Dharmdev enterprises

Dharmdev enterprises we make flyash brics and interlocking bricks

"ढर्मदेव एंटरप्राइजेस के साथ नए निर्माण का नया सफर! हम गर्व से पेश करते हैं, फ्लाई ऐश और जिग-जैग ब्रिक्स एवं इंटरलॉकिंग ...
05/11/2023

"ढर्मदेव एंटरप्राइजेस के साथ नए निर्माण का नया सफर! हम गर्व से पेश करते हैं, फ्लाई ऐश और जिग-जैग ब्रिक्स एवं इंटरलॉकिंग एक उत्कृष्ट निर्माण सामग्री की विशेषता। हमारे ब्रिक्स न केवल पर्यावरण के साथ मिलते हैं, बल्कि आपके पॉकेट में भी फायदेमंद हैं।

🌿 पर्यावरण के साथ मिलकर: हमारे फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्राकृतिक स्रोतों से निर्मित होते हैं और प्रदूषण को कम करने में मदद करते हैं।

💰 सस्ते और दायरिक: हमारे उत्पाद आपके निर्माण परियोजनाओं को बजट में रखते हैं, और आपकी बचत को बढ़ावा देते हैं।

🔨 मजबूत और दैरिक: हमारे जिग-जैग ब्रिक्स आपके निर्माण का बढ़ावा करते हैं, जो दीवारों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें लंबे समय तक टिकावट प्रदान करते हैं।

ढर्मदेव एंटरप्राइजेस के साथ आपका निर्माण सपना हकीकत में बदलता है। हमारे साथ संपर्क करें और आपकी निर्माण की आवश्यकताओं को पूरा करने में हमारी मदद लें!"

contact no - 829986250 , 9450705524 , 7007190972
Address - kajha khurd mau ( 276403 )

एक आम आदमी के मन में फ्लाई एश ब्रिक्स के बारे में प्रश्न होता है :-1) क्या यह ईंट मिट्टी से बने लाल ईंट की तुलना में ज्य...
23/03/2021

एक आम आदमी के मन में फ्लाई एश ब्रिक्स के बारे में प्रश्न होता है :-
1) क्या यह ईंट मिट्टी से बने लाल ईंट की तुलना में ज्यादा मजबूत होता है?
2) क्या इस ईंट की उम्र (life) लाल ईंट से कम होती है?


अगर आप इन सभी सवालों का अपनें जवाब से ग्राहक को संतुष्ट कर सके तो निश्चय ही ईंट की बिक्री में बदलाव आऐगा।
उत्तर:
1) बेशक, चूँकि फ्लाई एश ब्रिक्स 40 टन से भी अधिक प्रेशर से दबाकर बनाई जाती है, आप साउंड टेस्ट से एवं ईंट को पटक कर भी देख सकते हैं।या फिर जिनके पास strength testing machine है उससे भी टेस्ट कर सकते हैं।लाल ईट की अधिकतम दबाव क्षमता 5MPA तक ही होती है जबकि एश ब्रिक्स की 7 से 15MPA तक होती है।
2) लाल ईंट से बने धरों में अगर प्लास्टर नही किया गया हो तो 2 से 3 सालों में ही ईंट घुनले लग जा ता है, जबकि एश ब्रिक्स में ऐसा नही होता। इसका कारण यह है कि इसे तैयार करते समय इसे कम से कम 7 दिन तक पानी में डूबाकर रखा जाता है और उसके बाद ईंट को 15 दिन तक धछप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस तरह फ्लाई एश ब्रिक्स को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 25 दिन का समय लगता है।

29/01/2021

एक आम आदमी के मन में फ्लाई एश ब्रिक्स के बारे में प्रश्न होता है :-
1) क्या यह ईंट मिट्टी से बने लाल ईंट की तुलना में ज्यादा मजबूत होता है?
2) क्या इस ईंट की उम्र (life) लाल ईंट से कम होती है?
3) क्या फ्लाई एश ब्रिक्स में लाल ईंट की अपेक्षा प्लास्टर की पकड़ कमजोर होती है?
4) सभी सरकारी भवनों में फ्लाई एश ब्रिक्स का उपयोग होता है लेकिन कुछ सालों बाद भवन में (crack) दरार आ जाती है क्यों ?

अगर आप इन सभी सवालों का अपनें जवाब से ग्राहक को संतुष्ट कर सके तो निश्चय ही ईंट की बिक्री में बदलाव आऐगा।उत्तर:
1) बेशक, चूँकि फ्लाई एश ब्रिक्स 40 टन से भी अधिक प्रेशर से दबाकर बनाई जाती है, आप साउंड टेस्ट से एवं ईंट को पटक कर भी देख सकते हैं।या फिर जिनके पास strength testing machine है उससे भी टेस्ट कर सकते हैं।लाल ईट की अधिकतम दबाव क्षमता 5MPA तक ही होती है जबकि एश ब्रिक्स की 7 से 15MPA तक होती है।

2) लाल ईंट से बने धरों में अगर प्लास्टर नही किया गया हो तो 2 से 3 सालों में ही ईंट घुनले लग जाता है, जबकि एश ब्रिक्स में ऐसा नही होता। इसका कारण यह है कि इसे तैयार करते समय इसे कम से कम 7 दिन तक पानी में डूबाकर रखा जाता है और उसके बाद ईंट को 15 दिन तक धछप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस तरह फ्लाई एश ब्रिक्स को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 25 दिन का समय लगता है।

3) चूँकि फ्लाई एश के particles 200 micron के होते हैं। इस कारण इसे जब high pressure machine से अन्य सामाग्री मिलाकर दबाया जाता है इस कारण ईंट की सतह चिकनी हो जाती है, हम इसे चाह कर भी खुरदरा नही बना सकते। इसी fine particles के कारण एश ब्रिक्स ज्यादा compact होता है।
इस कारण ऐसा नही है कि इसमें प्लास्टर नही पकड़ेगा, अगर सीमेंट से बनी ईंट में सीमेंट नही पकड़ेगा तो क्या मिट्टी पकड़ेगा। प्लास्टर का असली पकड़ ईंट के चारों तरफ लगे सीमेंट रेती के गारे से होता है न कि ईंट के सतह से ।
कुछ मिस्त्री गारे की मात्रा कम करके ईंट जोड़ाई करते समय ईंट को चिपकाकर दीवाल चुनाई करते हैं इस कारण दीवाल की पूरी सतह ईंट के कारण चिकनी हो जाती है, प्लास्टर करते समय मिस्त्री दीवाल पर सीमेंट का घोल भी नही डालता। Curing भी सही होना,एवं रेत और सीमेंट प्लास्टर के समय सही अनुपात में न होना।
ऐसे मिस्त्रियों की गलती से प्लास्टर कमजोर हो जाता है और लोग ईंट को दोष देते हैं।

4) सभी सरकारी भवनों में CPWD के मानक के अनुरुप कार्य नहीं होता यह सभी जानते हैं। ठेकेदार अपनी आमदानी को बढ़ाने के लिए सस्ते से सस्ते सामाग्रियों का उपयोग करता है।

आखरी में मैं आपसे एक बात कहना चाहूंगा ईंट की quality को बेहतर से बेहरत बनाने की कोशिश करें।आपकी ईंट की quality में निम्न कारणों से भी फर्क पड़ता है::
# फ्लाई एश की quality
# रेत एवं stone dust की quality
# lime, gypsum की quality
# cement और chemical hardener की
quality
# machine की quality एवं hydrolic pressure
# mixing का तरीका
# सभी materials का सही अनुपात

29/01/2021

Some Precise Points about Fly Ash Bricks

Flyash bricks are light weight material compared to clay bricks, so it is suitable for multi storey building, Less weight means Less stress on building , safety assured.

Low absorption of heat, FAB (fly ash bricks) absorbs less heat than normal bricks, it keeps your building cool even in summer, hence most suitable for Indian conditions.

Uniform shape – hence no plastering required if used for compound wall or godowns.

Less mortar required in construction, because all bricks are machine made and even in shape.

High compressive strength compared to normal bricks – No more wastages during transport.

Less porous, absorbs very little water, whereas burnt clay bricks absorbs more water during construction. Saves money on water during construction and even keeps your building strong during rainy seasons.

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