16/01/2026
एक कंट्रोल पैनल की आत्मकथा
मैं जब पैदा हुआ,
तो मैं कुछ भी नहीं था—
बस एक खाली बॉक्स।
न धड़कन,
न दिशा,
न मक़सद।
फिर किसी ने मुझे हाथ लगाया।
ध्यान से।
जैसे कोई ज़िम्मेदारी उठाता है।
एक-एक पार्ट आया।
किसी ने मुझे समझ दी,
किसी ने सुरक्षा,
किसी ने नियंत्रण।
हर चीज़ जल्दबाज़ी में नहीं,
समझ के साथ रखी गई।
जैसे यहाँ गलती की जगह नहीं,
सिर्फ़ भरोसे की जगह हो।
फिर तारें आईं।
नसों की तरह।
मुझे ज़िंदा करने वाली।
हर कनेक्शन के साथ
मैं कुछ और बनता गया—
मशीन नहीं,
एक भरोसेमंद सिस्टम।
जब आख़िरी स्क्रू कसा गया,
तो किसी ने कुछ कहा नहीं।
बस देखा…
और सिर हिला दिया।
आज मैं चुपचाप काम करता हूँ।
क्योंकि जिन चीज़ों में जान होती है,
वो शोर नहीं करतीं।
यही वजह है
कि SmarTech का कंट्रोल पैनल
सिर्फ़ चलता नहीं—
भरोसा निभाता है।