10/02/2024
स्त्रियां...
बाथरूम में जाकर कपड़े भिगोती हैं,
बच्चों और पति की शर्ट की कॉलर घिसती हैं, बाथरूम का फर्श धोती हैं ताकि चिकना न रहे,
फिर बाल्टी और मग भी मांजती हैं तब जाकर नहाती हैं
और तुम कहते हो कि स्त्रियां नहाने में कितनी देर लगातीं हैं।
स्त्रियां...
किचन में जाकर सब्जियों को साफ करती हैं, तो कभी मसाले निकलती हैं। बार बार अपने हाथों को धोती हैं, आटा गूंथती हैं, बर्तनों को कपड़े से पोंछती हैं।
वही दही जमाती घी बनाती हैं
और तुम कहते हो खाना में कितनी देर लगेगी ???
स्त्रियां...
बाजार जाती हैं। एक एक सामान को छांट ती हैं, अच्छी सब्जियों फलों को छाट ती हैं, पैसे बचाने के चक्कर में पैदल
चल देती हैं, भीड़ में दुकान को तलाशती हैं।
और तुम कहते हो कि इतनी देर से क्या ले रही थी ???
स्त्रियां...
बच्चो और पति के जाने के बाद चादर की सलवटें सुधारती हैं, सोफे के कुशन को ठीक करती हैं, सब्जियां फ्रिज में रखती हैं, कपड़े प्रेस करती हैं, राशन जमाती हैं, पौधों में पानी डालती हैं, कमरे साफ करती हैं,
बर्तन सामान जमाती हैं, और तुम कहते हो कि
दिनभर से क्या कर रही थी ???
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स्त्रियां...
कहीं जाने के लिए तैयार होते समय कपड़ों को उठाकर लाती हैं, दूध खाना फ्रिज में रखती हैं बच्चों को दिदायतें देती हैं, नल चेक करती हैं, दरवाजे लगाती हैं,
फिर खुद को खूबसूरत बनाती हैं ताकि तुमको अच्छा लगे और तुम कहते हो कितनी देर में तैयार होती हो।
स्त्रियां...
बच्चों की पढ़ाई डिस्कस करती, खाना पूछती,
घर का हिसाब बताती, रिश्ते नातों की हाल-चाल बताती,
फीस बिल याद दिलाती और तुम कह देते कि कितना बोलती हो।
स्त्रियां...
दिनभर काम करके थोड़ा दर्द तुमसे बाट लेती हैं,
मायके की कभी याद आने पर दुखी होती हैं,
बच्चों के नंबर कम आने पर परेशान होती हैं,
थोड़ा सा आंसू अपने आप आ जाते हैं,
मायके में ससुराल की इज़्ज़त, ससुराल में मायके की बात को रखने के लिए कुछ बातें बनाती हैं और तुम कहते हो कि स्त्रियां कितनी नाटकबाज होती हैं।
पर स्त्रियां फिर भी तुमसे ही सबसे ज्यादा प्यार करती हैं...
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