27/08/2018
ड्रिलिंग दर
1. आपूर्ति और मांग - सूक्ष्म अर्थशास्त्र में, आपूर्ति और मांग के एक बाजार में मूल्य निर्धारण का एक आर्थिक मॉडल है। जब ड्रिलिंग मशीन ज़्यादा हो जाएँगी तब ड्रिलिंग रेट का कम होना स्वाभाविक है! यह विज्ञान का नियम भी है!
2. अर्थव्यवस्था - किसी भी देश की अर्थव्यवस्था भी मूल्य निर्धारण का काम करती है! भारत में किसानो की वित्तीय दशा बहुत अच्छी नहीं है इस कारण से भी ड्रिलिंग रेट कम हो रही है!
3. ड्रिलिंग पर जी॰एस॰टी॰ - 18% जी॰एस॰टी॰ भी ड्रिलिंग रेट पर प्रभाव डाल रहा हैं! यह प्रभाव प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पड़ रहा हैं!
4. ड्रिलिंग खर्चें - आए दिन महंगई भड़ने के कारण भी ड्रिलिंग व्यवसाय में लाभ में कमी आ रही है!
5. आए दिन डीज़ल की रेट में निरंतर वृद्घि!
सुझाव ड्रिलिंग व्यवसाय में लाभ कैसे हो
1. प्रत्येक रिग मालिक को सर्व प्रथम अपने प्रत्यक्ष और परोक्ष समस्थ ख़र्च का एक ब्योरा लिखना चाइए! उसके उपरांत ड्रिलिंग रेट का निर्धारण करना चाइए!
2. आपसी स्पर्धा को छोड़ व्यवसाय के हित को ध्यान में रखकर ही काम करना चाइए!
3. हम सब मिलकर एक साथ होकर काम करेंगे तभी ये सम्भव है!
एकता में बल! एक लघु कहानी
एकता की शक्ति – एक बार हाथ की पाँचों उंगलियों में आपस में झगड़ा हो गया| वे पाँचों खुद को एक दूसरे से बड़ा सिद्ध करने की कोशिश में लगे थे|
अंगूठा बोला की मैं सबसे बड़ा हूँ, उसके पास वाली उंगली बोली मैं सबसे बड़ी हूँ इसी तरह सारे खुद को बड़ा सिद्ध करने में लगे थे जब निर्णय नहीं हो पाया तो वे सब अदालत में गये |
न्यायाधीश ने सारा माजरा सुना और उन पाँचों से बोला की आप लोग सिद्ध करो की कैसे तुम सबसे बड़े हो? अंगूठा बोला मैं सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा हूँ क्यूंकी लोग मुझे हस्ताक्षर के स्थान पर प्रयोग करते हैं|
पास वाली उंगली बोली की लोग मुझे किसी इंसान की पहचान के तौर पर इस्तेमाल करते हैं| उसके पास वाली उंगली ने कहा की आप लोगों ने मुझे नापा नहीं अन्यथा मैं ही सबसे बड़ी हूँ |
उसके पास वाली उंगली बोली मैं सबसे ज़्यादा अमीर हूँ क्यूंकी लोग हीरे और जवाहरात और अंगूठी मुझी में पहनते हैं| इसी तरह सभी ने अपनी अलग अलग प्रशन्शा की |
न्यायाधीश ने अब एक रसगुल्ला माँगाया और अंगूठे से कहा की इसे उठाओ, उंगुठे ने भरपूर ज़ोर लगाया लेकिन रसगुल्ले को नहीं उठा सका | इसके बाद सारी उंगलियों ने एक एक करके कोशिश की लेकिन सभी विफल रहे|
अंत में न्यायाधीश ने सबको मिलकर रसगुल्ला उठाने का आदेश दिया तो झट से सबने मिलकर रसगुल्ला उठा दिया |
फ़ैसला हो चुका था, न्यायाधीश ने फ़ैसला सुनाया कि तुम सभी एक दूसरे के बिना अधूरे हो और अकेले रहकर तुम्हारी शक्ति का कोई अस्तित्व नहीं है, जबकि संगठित रहकर तुम कठिन से कठिन कम आसानी से कर सकते हो|
तो मित्रों, एकता में बहुत शक्ति होती है यही इस कहानी की शिक्षा है, एक अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ सकता..
आपका अपना
मनीष भारद्वाज
ड्रिलिंग टुडे