12/04/2026
*🌹नाथ ! हौं निपट निरंकुस नीच।*
*नरक-कीट मैं पर्यौ रहौं नित*
*पाप-तापके कीच॥*
*🌹करौं भगति की बात मनोहर,*
*भीतर भरे बिकार।*
*अंतरजामी तुमहू तें मैं*
*करौं कपट-ब्यौहार॥*
*🌹निज सुभावबस, नाथ दयाकर !*
*पकरि उधारौ हाथ।*
*पाप-प्रबाह पतित पामर कौं*
*करौ, कृपालु ! सनाथ॥*
*🌹परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, परम पूज्य श्रीभाईजी🌹*
*🌹🌹🌹🌹🌹🌹 बहुत बहुत बड़ा रहस्य : परम पूज्य श्रीभाईजी के जीवन की ऐसी अनुभूति, जिसकी केवल आंशिक समझ आने पर हमारे हाथ जैकपौट लग जाएगा।🌹*
*🌹परम पूज्य श्रीराधा बाबा के दिव्य वचन.... 🌹श्रीभाईजी अनवरत श्रीकृष्ण को ही देखते हैं, उन्हें ही सुनते हैं, उनमें ही जागते-सोते, निवास करते हैं । भाईजी एक अविच्छिन्न अखण्ड भगवत्प्रेम के महान् अप्राकृत चिन्मय समुद्र में डूबकर तन्मय हो गये हैं । उनका जीवन अखण्ड घन श्रीकृष्ण-प्रेमरस ही है । वे श्रीकृष्ण-सुख-तात्पर्यैक प्रीति की जीती-जागती मूर्त्ति हैं। 🌹.....परम पूज्य श्रीभाईजी श्रीराधा रानी (अभिन्न स्वरूपा) हैं। भाईजी की वाणी अपनी वाणी नहीं, साक्षात् श्रीराधा रानी की ही वाणी है।🌹*
*परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, पद संख्या 1124 🌹 जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*
🌹 *मेरे* द्वारा बोल रहे हैं केवल मेरे वे *भगवान* ।
मेरे द्वारा छेड़ रहे हैं वे निज मधु मुरलीकी तान॥
🌹 मेरे जीवनमें है अब तो एकमात्र उनका ही स्थान।
अत: *उन्हींकी* होती मुझमें *क्रिया* नित्य सब क्षुद्र-महान॥