Krishna Bhakti Ras

Krishna Bhakti Ras Krishna and His Beloved Radhe are sweet ! Experience Their amazing love by joining us in our journey Krishna Bhakti is the sweetest experience! Jai Radhe!

To stir this Bhakti in our hearts we need to hear and see the Form of the Lord, His Name, His pastimes and His Dham! As our Bhakti increases, Krishna Himself feels attracted to us, and it is He who comes closer to us . We move one step, and He moves 100 steps! On this page, I shall present the many aspects and facets of Krishna, each one sweeter than the other. I shall share my realizations, I sha

ll share Krishna Kathas, and at times I shall share my own experiences too. I am 62 years old, Indian body, and my Ishta Dev has been, and will always be, Sri Krishna, but I have always approached Him through Mother Radha. She is a sweet and loving Mother…and She has tolerantly shown me the way over the years. I am also grateful to my parents and to my Gurudev for their love, patience and guidance since I was a child. If the pinnacle of Bhakti is a one hundred storey building, I am only on the first step of the first storey and I am not saying this just to be humble or polite. Having said that, I have felt so much joy that I told myself if there is this much joy just in the first step, then I would love to climb the floors faster and faster so I can experience the greater joy that is waiting! So please stay with me, interact with me……….and let us travel on this road together . I would like to dedicate this page to my Pujya Gurudev, without whom I am nothing! Jai Krishna! Jai Vrindavan!

*सौंप दिये मन प्राण तुम्हींको**सौंप दिये ममता अभिमान।**जब जैसे, जी चाहे बरतो,**अपनी वस्तु सर्वथा जान॥**मत सकुचाओ मनकी कर...
24/08/2026

*सौंप दिये मन प्राण तुम्हींको*
*सौंप दिये ममता अभिमान।*
*जब जैसे, जी चाहे बरतो,*
*अपनी वस्तु सर्वथा जान॥*

*मत सकुचाओ मनकी करते,*
*सोचो नहीं दूसरी बात।*
*मेरा कुछ भी रहा न अब तो,*
*तुमको सब कुछ पूरा ज्ञात॥*

*🌹परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, परम पूज्य श्रीभाईजी 🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹परम पूज्य श्रीभाईजी🌹*

*🌹भगवान् सर्वशक्तिमान हैं। भगवान् सर्वज्ञ हैं। भगवान् सर्वेश्वर हैं एवं भगवान् सर्वसुह्रद हैं। संसार में जो कुछ भी होता है भगवान् की देख - रेख में होता है, भगवान् के नियंत्रण में होता है।🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹तुम्हारे जीवन का भगवत्प्राप्ति ही परम ध्येय है। इसलिये तुम अपना प्रत्येक काम भगवान्‌ की प्रसन्नता के लिये ही करो। निरन्तर भगवान्‌ का स्मरण करते हुए अपने प्रत्येक कर्म से भगवान्‌ की पूजा करो। कर्म करो सुचारु रूपसे, कहीं चूको मत। आलस्य या प्रमादसे कर्मका स्वरूप मत बिगाड़ो। पर करो केवल भगवान्‌के लिये ही भोगों की आशा- आकांक्षा को मनसे निकाल दो।🌹*

*🌹परम पूज्य भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार*🌹

*राधा राधा राधा राधा राधा*  *_🌹भगवान् की लीला-कथा ही ऐसी है कि वह कैसे भी कानों में जाय, पाप-ताप को नष्ट कर देती है। पर ...
24/08/2026

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*_🌹भगवान् की लीला-कथा ही ऐसी है कि वह कैसे भी कानों में जाय, पाप-ताप को नष्ट कर देती है। पर जो श्रीकृष्ण के भक्त हैं, प्रेमी हैं, उनके मुख से यदि कथा सुनने का सौभाग्य मिल जाय, तब तो पाप-ताप रह ही नहीं सकते; क्योंकि उनका मन श्रीकृष्ण के साथ जुड़ा रहता है। अतएव वे जो भी शब्द उच्चारण करते हैं; श्रीकृष्ण की प्रेरणा से ही ।🌹_*

*🌹ग्रंथ : 'श्रीराधा-माधव- चिन्तन'🌹*

*🌹परम पूज्य भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार 🌹*

*🌹🌹🌹बहुत बहुत महत्वपूर्ण बात 🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹महाभाव दिनमणि श्रीराधाबाबा🌹*

*🌹विश्वास करें- हम चाहे मलिन-से-मलिन प्राणी क्यों न हों, केवल मैलेकी तरह हममें दुर्गन्ध ही क्यों न भरी हो, बाहर भीतर, नीचे-ऊपर, केवल बदबू आ रही हो, पर संत नामकी वस्तु इतनी पवित्र है, इतनी सरस है कि उसका स्पर्श होते ही हम बिल्कुल उसी ढाँचे में ढल जायेंगे। आग क्या यह देखती है कि यह मैला है? मैला आगमें पड़ा कि सारा-का-सारा अंगारा बन जायगा। हम मिलें, उसमें मिलें, अपनी सारी मलिनता, सारी दुर्गन्ध लेकर मिले। दिन-रात उसके इशारेपर चलनेकी चेष्टा करें दिन-रात सोचे- 'संत' कितने कृपालु है।🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹याद रखो—संसार के भोग पहले तो इच्छानुसार प्राप्त नहीं होते, प्राप्त भी अधूरे ही होते हैं और प्राप्त होकर निश्चय ही नष्ट हो जाते हैं; परंतु अनन्य इच्छा करनेपर भगवान् निश्चय ही प्राप्त होते हैं, इच्छानुसार कृपा, प्रेम या दर्शन देकर कृतार्थ करते हैं। वे सर्वत्र सदा पूर्णता से परिपूर्ण हैं तथा प्राप्त होकर कभी बिछुड़ना उनके स्वभाव से विरुद्ध है।🌹*

*- 🌹परम पूज्य "भाईजी” श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार 🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*  *🌹परम पूज्य श्रीभाईजी🌹*  *🌹सावधान होकर श्रीभगवन्नाम जप कीर्तन आदि का सहारा लेकर हमें अपने मन...
24/08/2026

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹परम पूज्य श्रीभाईजी🌹*

*🌹सावधान होकर श्रीभगवन्नाम जप कीर्तन आदि का सहारा लेकर हमें अपने मनुष्य जन्म को सार्थक करना चाहिए। वर्तमान काल में श्रीभगवन्नाम ही सर्वोपरि सरल साधन है जिसे कोई भी प्रत्येक अवस्था में कर सकता है।*

*परम मधुर जुगल नाम। राधे कृष्ण सीताराम*।।

*🌹श्रीभाईजी कथामृत* : गम्भीरचन्द दुजारी🌹

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹यह निश्चय करो कि ईश्वर सदा ही सत्कर्ममें सहायक होता है, सम्भव है कभी-कभी तुम्हें सत्कर्मके पथपर दृढ़ करनेके लिये तुम्हारे सामने ईश्वर विघ्नों को भेजें, पर तुम्हें चाहिये कि विघ्नोंको तुम्हारे उत्साह वर्धनके लिये भेजा हुआ समझकर उनसे डरो मत। यदि कभी वे ऐसे प्रबल हों कि तुम्हें स्थूल शरीरसे उनके सामने झुकना पड़े तो झुक जाओ; परंतु मनसे कभी मत झुको । सत्कर्ममें मनका प्रवाह अबाध बहने दो और यह निश्चय रखो कि ईश्वर तुम्हारी सेवा स्वीकार कर रहा है।🌹*

*🌹श्रद्धेय भाईजी श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार 🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹भगवान् के अनन्य स्मरणसे लाभ🌹*

*🌹याद रखो—विषयी भगवान्‌का सेवन विषयके लिये करता है, उसके मनमें विषय-भोग प्रधान है और भगवान् गौण। और भक्त विषयका सेवन भी भगवत्-प्रीतिके लिये ही करता है, उसके मन भगवान् ही सब कुछ हैं, विषय तो तभी प्रयोजनीय हैं जब उनके द्वारा भगवान्‌की सेवा होती हो।🌹*

*- 🌹परम पूज्य "भाईजी” श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार*🌹

*आज के संध्या दर्शन ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के, तथा परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, पद संख्या 408 🌹जय जय श्रीराधे 🌹🙏🌹* प्...
24/08/2026

*आज के संध्या दर्शन ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के, तथा परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, पद संख्या 408 🌹जय जय श्रीराधे 🌹🙏🌹*

प्रिय-बियोग में अबिरत स्मृति सौं भयौ नित्य मानस-संयोग।
भई बियोगिनि, नित्य स्याम-संजोगिनि, भूली दु:ख-बियोग॥

रह्यौ न मन कछु देस-काल-कुल-लोक-बेद के भय कौ भाव।
नित निरवधि निर्बाध मिलन मनभर प्रिय कौ, चित नित नव चाव॥

उदै भई रति पूर्ण तीब्रतम, छाई सब दिसि, ओर-न-छोर।
बितरत नित्य नवीन अमित रस-सुख पिय, नित्य-रमन मन-चोर॥

भंगुर-भयद मिलन सुख सीमित, सुख-बियोग अतिसै अबिराम।
या तैं रहीं गोपिका ब्रज में, तजि भजनीय द्वारका-धाम॥

*साक्षात् प्रेमावतार, श्रीराधा रानी अभिन्न स्वरूपा, परम पूज्य श्रीभाईजी की गीता वाटिका गोरखपुर स्थित समाधि के समक्ष, परम...
24/08/2026

*साक्षात् प्रेमावतार, श्रीराधा रानी अभिन्न स्वरूपा, परम पूज्य श्रीभाईजी की गीता वाटिका गोरखपुर स्थित समाधि के समक्ष, परम पूज्य श्री राधा बाबा के समीप, परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ से, पद संख्या 615🌹 जय जय श्रीराधे🌹🙏🌹*

तुम हो यन्त्री, मैं यन्त्र, काठकी पुतली मैं, तुम सूत्रधार।
तुम करवाओ, कहलाओ, मुझे नचाओ निज इच्छानुसार॥

मैं करूँ, कहूँ, नाचूँ नित ही परतन्त्र, न कोई अहंकार।
मन मौन नहीं, मन ही न पृथक्, मैं अकल खिलौना, तुम खिलार॥

क्या करूँ, नहीं क्या करूँ—करूँ इसका मैं कैसे कुछ विचार ?
तुम करो सदा स्वच्छन्द, सुखी जो करे तुम्हें सो प्रिय विहार॥

अनबोल, नित्य निष्क्रिय, स्पन्दनसे रहित, सदा मैं निर्विकार।
तुम जब जो चाहो, करो सदा बेशर्त, न कोई भी करार॥

मरना-जीना मेरा कैसा, कैसा मेरा मानापमान।
हैं सभी तुम्हारे ही, प्रियतम ! ये खेल नित्य सुखमय महान॥

कर दिया क्रीडनक बना मुझे निज करका तुमने अति निहाल।
यह भी कैसे मानूँ-जानूँ, जानो तुम ही निज हाल-चाल॥

इतना मैं जो यह बोल गयी, तुम जान रहे—है कहाँ कौन ?
तुम ही बोले भर सुर मुझमें मुखरा-से मैं तो शून्य मौन॥

*साक्षात् प्रेमावतार, श्रीराधा रानी अभिन्न स्वरूपा, परम पूज्य श्रीभाईजी के परम दिव्य पावन कक्ष में, परम भागवत पद रत्नाकर...
24/08/2026

*साक्षात् प्रेमावतार, श्रीराधा रानी अभिन्न स्वरूपा, परम पूज्य श्रीभाईजी के परम दिव्य पावन कक्ष में, परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ, पद संख्या 454🌹*

सौंप दिये मन प्राण तुम्हींको सौंप दिये ममता अभिमान।
जब जैसे, जी चाहे बरतो, अपनी वस्तु सर्वथा जान॥

मत सकुचाओ मनकी करते, सोचो नहीं दूसरी बात।
मेरा कुछ भी रहा न अब तो, तुमको सब कुछ पूरा ज्ञात॥

मान-अमान, दु:ख-सुखसे अब मेरा रहा न कुछ सम्बन्ध।
तुम्हीं एक कैवल्य मोक्ष हो, तुम ही केवल मेरे बन्ध॥

रहूँ कहीं, कैसे भी, रहती बसी तुम्हारे अंदर नित्य।
छूटे सभी अन्य आश्रय अब, मिटे सभी सम्बन्ध अनित्य॥

एक तुम्हारे चरणकमलमें हुआ विसॢजत सब संसार।
रहे एक स्वामी बस, तुम ही, करो सदा स्वच्छन्द विहार॥

*स्वयं श्री राधा रानी द्वारा बताया गया श्री राधा रानी की प्राप्ति का सरल सीधा दिव्य मार्ग।🌹 परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ ,...
24/08/2026

*स्वयं श्री राधा रानी द्वारा बताया गया श्री राधा रानी की प्राप्ति का सरल सीधा दिव्य मार्ग।🌹 परम भागवत पद रत्नाकर ग्रंथ , पद संख्या 23 🌹जय जय श्री राधे 🌹🙏🌹*

कृपा जो राधाजू की चहियै।
तो राधाबर की सेवा में तन मन सदा उमहियै॥

माधव की सुख-मूल राधिका, तिनके अनुगत रहियै।
तिन के सुख-संपादन कौ पथ सूधौ अबिरत गहियै॥

राधा पद-सरोज-सेवा में चित निज नित अरुझइयै।
या बिधि स्याम-सुखद राधा-सेवा सौं स्याम रिझइयै॥

रीझत स्याम, राधिका रानी की अनुकंपा पइयै।
निभृत निकुंज जुगलसेवा कौ सरस सुअवसर लहियै॥

*🌹जय जय प्रियतम काव्य में से, परम पूज्य श्रीराधाबाबा द्वारा रचित कुछ दिव्य पंक्तियां।🌹* 🌹सांवर सांवर ही आगे हैं,सांवर ही...
24/08/2026

*🌹जय जय प्रियतम काव्य में से, परम पूज्य श्रीराधाबाबा द्वारा रचित कुछ दिव्य पंक्तियां।🌹*

🌹सांवर सांवर ही आगे हैं,
सांवर ही पीछे हैं, प्रियतम!
सांवर सांवर ही दहिने हैं,
सांवर ही बायें हैं, प्रियतम!

🌹सांवर सांवर ही नीचे हैं,
सांवर ही ऊपर हैं, प्रियतम!
सांवर सांवर ही अब केवल,
सर्वत्र अवस्थित हैं, प्रियतम!

🌹है तत्व बताया तुमने ही,
तुम ही तुम हो मेरे प्रियतम!
है या केवल राधा राधा,
फिर नित्य युगल भी हो, प्रियतम!

🌹यह मैं प्रतिबिंबित है प्रतिमा,
राधा की माया में, प्रियतम!
है किंतु बिम्ब से भिन्न कहां,
सत्ता छायाकी, हे प्रियतम!

🌹राधिका रमण निरवधि जय जय,
जय अंबुज नयन सदा, प्रियतम!
जय सतत नंदनंदन जय जय,
जय नाथ निरंतर, हे प्रियतम!

🌹गोपिका प्राण सर्वदा तथा,
जय मन्मथ मथन, अहो प्रियतम!
चिरकाल विश्वरंजन जय, जय,
जय कृष्ण अहर्निश, हे प्रियतम!

*🌹🌹🌹 बहुत बहुत बहुत महत्वपूर्ण संदेश ..... परम पूज्य श्रीभाईजी द्वारा दिया गया, भगवत् प्राप्ति के मार्ग का निश्चित शौर्ट...
24/08/2026

*🌹🌹🌹 बहुत बहुत बहुत महत्वपूर्ण संदेश ..... परम पूज्य श्रीभाईजी द्वारा दिया गया, भगवत् प्राप्ति के मार्ग का निश्चित शौर्टकट।🌹*

*राधा राधा राधा राधा राधा*

*🌹सन्त वास्तवमें भगवान् के संदेशवाहक हैं; भगवद्भावों का सहज ही आचरण करनेवाले और प्रचार करनेवाले हैं। जगत् सन्तसे शून्य कभी होता नहीं। सन्तके शरीरसे, मनसे जो कुछ भी परमाणु जगत्में फैलते हैं, उनसे जगत्का कल्याण अपने-आप होता रहता है। संतकी वाणीका सीधा संस्पर्श हो जाय - देख सकें, सुन सकें, पढ़ सकें,* *मनन कर सकें - तो कहना ही क्या; किन्तु यदि केवल सुन ही सकें तो उसका फल भी अमोघ है।*

*🌹सबसे बड़ा लाभ है भगवत्प्रेम। यह सचमुच संतकी कृपासे ही मिलता है। इस परम पुरुषार्थकी प्राप्ति और किसीसे नहीं हो सकती संतकी रुचिका अनुसरण करना चाहिये, केवल आज्ञाका ही नहीं।* *संतके चरणोंका मन-ही-मन ध्यान करना। (चरणोंका परिसेवन मनके आभ्यन्तरिक स्थलमें किया जाय तो इसमें न तो कोई हानि है और न यह प्रत्यक्ष चरणसेवनसे कुछ कम ही है।)*

*🌹संतसे मन-ही-मन प्रार्थना की जाय ! यह भाव दृढ़ करे कि संत सदा मेरे साथ हैं और निरन्तर मेरी प्रत्येक क्रियाको देखते हैं और मझे अपनाये हुए हैं। यह अनुभव करे कि संतकी कृपा मुझपर बरस रही है। उसकी कृपासे मेरे अंदर दैवी भाव आ रहा है। इससे संतके हृदयका दैवी भाव अपने अंदर बड़ी शीघ्रतासे आता है। संतकी शरीर, वाणी और मन-तीनोंसे सेवा करे।*

*श्रीराधा रानी अभिन्न स्वरूपा, परम पूज्य श्रीभाईजी की चरण वंदना।🌹 जय जय श्रीराधे 🌹🙏🌹* 🌹जिन चरणों की मङ्गलकारी कृपा अहैतु...
24/08/2026

*श्रीराधा रानी अभिन्न स्वरूपा, परम पूज्य श्रीभाईजी की चरण वंदना।🌹 जय जय श्रीराधे 🌹🙏🌹*

🌹जिन चरणों की मङ्गलकारी कृपा अहैतुक के द्वारा,
राधा- माधव- लीला की शुभ हुई प्रवाहित रस-धारा।

🌹पीकर जिसे, नहाकर जिसमें, केवल दर्शन कर जिसका,
झूम रहा है, झूमेगा युग-युग तक श्री-परिकर सारा ॥

🌹जिन चरणोंके नख-चन्द्रों से तमका पट जा दूर पड़ा,
जन्म-जन्मसे मोह-जाल बन नयनों पर जो था जकड़ा।

🌹खुले आज, कुछ कल उन्मीलित; कुछ उसके भी अगले दिन,
लोचन होंगे, झलक उठेगा, राधारानी का मुखड़ा ॥

🌹जिन चरणोंके स्नेह-सिन्धु के भीतर रह, उसमें पलकर,
अनायास मूँगा- मोती बन गये रेत- चूना पत्थर ।

🌹इन प्रवाल- मुक्ताओं को उस मञ्जूषा में वास मिला,
रत्न जड़े जाते जिसमें से ले राधा के पायल पर।

🌹जिन चरणोंके नीचे पनपे, हुए बड़े हम, हुए खड़े,
उन चरणोंकी ही छाया में रज- राखी में रहें पड़े।

🌹जिन चरणों ने हम दीनों को राधा का दासत्व दिया,
वे ही शतदल-चरण हमारे हृदय-पटल पर रहें जड़े ॥

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