25/03/2026
ब्यावर जिले के साकेत नगर थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां परीक्षा परिणाम से निराश होकर एक 16 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना नरबदखेड़ा गांव की है।
जानकारी के अनुसार, भीम (सड़क का बाडिया) निवासी धर्मीचंद रेगर की 16 वर्षीय पुत्री वशिंका सिंघानिया बचपन से ही अपने नाना राजेंद्र लाल के घर नरबदखेड़ा में रहकर पढ़ाई कर रही थी।
वशिंका ब्यावर के बाल विद्या मंदिर (कॉलेज रोड) स्कूल में कक्षा 10 की छात्रा थी।
📌 गणित में ग्रेस बना तनाव की वजह
परिजनों और स्कूल शिक्षकों के अनुसार वांशिका पढ़ाई में होनहार छात्रा थी। हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में उसे 57.50 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे, जिसमें अंग्रेजी विषय में उसके सबसे अधिक अंक थे। लेकिन गणित विषय में ‘ग्रेस’ मिलने की बात से वह काफी आहत थी। उसे उम्मीद थी कि वह बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन परिणाम उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा।
इसी मानसिक तनाव के चलते उसने अपने मामा नरेंद्र लाल के घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
👨👩👧 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
वांशिका के पिता धर्मीचंद रेगर विद्युत विभाग में कार्यरत हैं, जबकि मां सोनू देवी गृहिणी हैं। वांशिका के दो छोटे जुड़वा भाई-बहन भी हैं। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
🚨 पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही साकेत नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों की मौजूदगी में शव को नीचे उतारा। प्रारंभ में शव को अमृतकौर अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया, हालांकि बाद में परिजनों ने पोस्टमार्टम नहीं करवाया और शव अपने साथ ले गए।
एएसआई उगम सिंह रावत के अनुसार, इस मामले में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है, फिर भी पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है कि आत्महत्या के पीछे केवल परीक्षा परिणाम ही कारण था या अन्य कोई दबाव भी था।
⚠️ समाज के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर इस गंभीर सच को सामने लाती है कि परीक्षा का दबाव बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। जरूरी है कि अभिभावक और शिक्षक बच्चों को परिणाम से अधिक प्रयास और मानसिक संतुलन का महत्व समझाएं।