Pawan Kumar Bhadu Roda-Nokha

Pawan Kumar Bhadu Roda-Nokha I love my mother and father.

पढ़े लिखें परिंदे कैद हैं, माचिस से मकान में।  9 से 6 की ड्यूटी, और मानसिक थकान में।।  🖋️मन गांव में ही रह गया, शरीर शहर...
04/06/2024

पढ़े लिखें परिंदे कैद हैं, माचिस से मकान में।
9 से 6 की ड्यूटी, और मानसिक थकान में।।
🖋️मन गांव में ही रह गया, शरीर शहर का वासी है।
ताज़ा बस, ख़बर यहाँ, तासीर बासी_बासी है।।
🖋️दो जन दोनों कमाने वाले, बच्चों को कौन संभाले।
टारगेट के पीछे भाग रहे हैं, तन को कर, बीमा के हवाले।।
🖋️यारों का न संग रहा, न न्योता न व्यवहार।
खुद के घर जाते हैं बन, जैसे रिश्तेदार।।
🖋️कर बंटवारा एकड़ बेचा, वर्ग फीट के दरकार में।
बिछड़े, पिछड़ा कह के, खो गए अगड़ों के कतार में।।
🖋️शुरुवाती; मज़ा बहुत है, एकाकी; स्वप्न; संसार में।
मुसीबत हमेशा हारा है, संगठिक संयुक्त परिवार में।।
🖋️ मात, पिता न आने को राजी, गांव में नौकरी है कहां जी।
जिनके पास दोनों है बंधुओं, उनका जीवन है शान में

पढ़े लिखें परिंदे कैद हैं, माचिस से मकान में।
9 से 6 की ड्यूटी, और मानसिक थकान में।।
🖋️🖋️

अभी पांच मिनट में बना देता हूं बोल बोल के आठ दस साइकिल को उलटा कर खोल के रख देता था दुकानदार । सब बैठ कर पांच मिनट का इन...
02/06/2024

अभी पांच मिनट में बना देता हूं बोल बोल के आठ दस साइकिल को उलटा कर खोल के रख देता था दुकानदार । सब बैठ कर पांच मिनट का इन्तजार करते रहते थे । ऐसी घटना के शिकार अक्सर बच्चे हो जाया करते थे । क्योंकि तब साइकिल होना अपने आप मे एक सम्पन्न होने की निशानी थी । अब धीरे धीरे लोग साइकिल को हीन भावना से देखने लगे है । बढ़े हुए तोंद लेकर चार चक्का गाड़ी से जिम जाकर साइकिल चलाते है । लेकिन बाहर साइकिल वालो को हीन भावना से देखते है ।

औरत से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैंये औरत के मूल में ही नहीं है अ...
02/06/2024

औरत से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं
ये औरत के मूल में ही नहीं है अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो उससे भी ऊब जाएगी
अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो उससे भी बिदक जाएगी
अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो उससे भी चिढ जाएगी
अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी
अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है
यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो संतुष्ट नहीं हो सकती
ये उसका स्वभाव है वो एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो बना ही न हो बन ही न सकता हो
ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ,
इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ
कपड़े का गट्ठर लगा देती है...
बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद आ भी गया, तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...
आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...
इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है औरत के अंदर ...
एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी
रंग उतर जाएगा चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी
बस यही खूबी औरत को विशिष्ट बनाती है
औरत से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं...
ये औरत के मूल में ही नहीं है...

आपकी बेटी वेश्या नही है... इस बात को समझिये...!!अगर आज से 50 साल पहले आपको हीरा मंडी जैसी वेशभूषा धारण करके और उनकी जैसी...
27/05/2024

आपकी बेटी वेश्या नही है... इस बात को समझिये...!!

अगर आज से 50 साल पहले आपको हीरा मंडी जैसी वेशभूषा धारण करके और उनकी जैसी अदाओं के साथ वीडियो बनाने के लिए बोला जाता तो शायद आप सोचती कि यह गलत है।

आज से 10 साल पहले कोई आपकी बेटी को इस तरह के कपड़े लेकर देता तो आप उससे जीवन भर के लिए रिश्ता खत्म कर लेते।

लेकिन बॉलीवुड ने धीरे धीरे करके इस मीठे जहर को आपकी रगों में डाला है की आज छोटी छोटी बच्चियों के मां-बाप खुद उन्हें इस तरह की वेशभूषा पहन कर रील बना रहे हैं।

आपकी अपनी सोचने की क्षमता लगभग खत्म हो चुके हैं और आप ना चाहते हुए भी उसे तरह की वेशभूषा और डायलॉग और अदाएं दिखाते हुए रील बना रही है।

किसके लिए मर्दों के मनोरंजन के लिए यहां खुद के लिए या फिर आप इसे खुद का टैलेंट समझ रहे हो...? सोचने वाली बात है ना कि, इससे सबसे ज्यादा फायदा कैसे मिलेगा।

कंपनी का काम होता है अपना प्रोडक्ट सेल करना और सेल करने के लिए वह किसी की हद तक गिर सकते हैं लेकिन यह आपकी अपनी सोचने समझने की क्षमता होनी चाहिए की गोबर को मफिन कह देने से वह मीठी नहीं हो जाती।

इसलिए अपनी बेटियों को समझायें... उन्हें सही मार्गदर्शन करें... सही गलत का पहचान करायें... वरना आज रील बना रही है तो कल रियल भी कर सकती है....!!

सिर्फ 2 मिनट का समय निकालकर जरूर पढ़ें-आज अचानक एक मोहतरमा की रील पर नजर पड़ी। वे न कोई गाना गा रहीं थी, न डांस कर रही थीं...
17/04/2024

सिर्फ 2 मिनट का समय निकालकर जरूर पढ़ें-
आज अचानक एक मोहतरमा की रील पर नजर पड़ी। वे न कोई गाना गा रहीं थी, न डांस कर रही थीं। कोई उपयोगी मैसेज नहीं, शेरो-शायरी या किसी व्यंजन की रेसिपी भी नहीं बताई उन्होंने। फिर भी रील पर हजारों की संख्या में लाइक्स और कमेंट्स थे। जिज्ञासा हुई, उनकी प्रोफाइल ओपन की तो आंखें फटी रह गईं। उस वक्त तक उनके 7 लाख, 77 हजार फॉलोवर्स थे।
पता चला कि वे हरेक रील में सिर्फ अंडर आर्म्स दिखाती हैं। कसम से बड़ा अजीब फील हुआ, जेहन में सवाल कौंधा कि आखिर हम क्या पसंद कर रहे हैं, किस दिशा में जा रहे हैं और इससे हमें क्या हासिल होने वाला है। ये कोई इकलौता उदाहरण नहीं है, बल्कि फेसबुक पर ऐसी हजारों आईडी और पेज हैं, जिन पर सिर्फ नग्नता परोसकर वायरल हुआ जा रहा है।
सोचा कि एक तरफ वे लोग हैं जो मेहनत करके न्यूज़ कंटेंट्स या अन्य उपयोगी जानकारियां एकत्रित करते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से सभी तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं, ताकि लोग देश-दुनिया के बारे में अपडेट रह सकें। लेकिन लोग हमें फॉलो करना पसंद नहीं करते, दूसरी तरफ अश्लील, भौंडे, शर्मनाक वीडियो बनाने वाले लोग हैं....क्या यह सोचना जरूरी नहीं कि आखिर हम किसे फॉलो कर रहे हैं और क्यों?
मुझे पता है कि यह सब पढ़ने के बाद भी लोगों को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है, लेकिन फिर भी मेरा अनुरोध है कि इस पोस्ट को सभी लोग फॉलो अवश्य करें। यदि हम सबके इस प्रयास से सोशल मीडिया की गंदगी साफ करने में थोड़ा सा भी दे सके तो यह सार्थक होगा।
अगर आप चाहें तो हमारे पेज को फॉलो भी करें🙏

09/04/2024

एक समय था जब देशी घी गरम किया जाता था या बनाया जाता था तो आसपास के तीन चार घरों तक उसकी महक फैल जाती थी ।

इतनी सुंदर महक होती थी कि पूरा मन मस्तिष्क सब गमगमा जाते थे ।

जिस पात्र में घी रखा जाता था , मात्र वही खुल जाए तब भी आसपास के वातावरण में घी की सुंदर महक फैल जाती थी ।

लेकिन आज कितने भी अच्छे brand का घी लाओ , कोई महक नहीं । यहाँ तक कि उसमें नाक भी घुसा लो तब भी वह महक नहीं मिलती जो आज के 20 से 30 वर्ष पहले मिलती थी ।

कितना मिलावट हम खाते हैं , यह सोचने वाली बात है ।

गाँवों में भी कमोबेश यही स्थिति हो गयी है , शुद्ध घी बनाने पर भी वह महक नहीं मिल पाती जो पहले होती थी ।

कारण एकमात्र यही है कि पहले गायों को चराया जाता था जो विभिन्न प्रकार की वनस्पति ग्रहण करती थी , वह भी बिना insecticides, pesticides , chemical fertilizers से युक्त ।

जो भी था शुद्ध ग्रहण करती थी । जितना भी वनस्पति या औषधि खाती या चरती थी , वह सब दूध में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा बन कर व्याप्त हो जाती थी । पूरा दूध ही औषधि युक्त होता था ।

तब तो दूध भी Oxytocin injection घोंप कर जबरदस्ती नहीं निकाला जाता था ।

लेकिन आज ठीक इसके विपरीत है , अब तो दूध में कोई औषधीय गुण ही नहीं बचा । Oxytocin injection से जबरदस्ती निकाले हुए insecticide, pesticide, chemical fertilizer से पोषित वनस्पतियों से बने दूध का हश्र धीरे धीरे Slow Poison में बदलता जा रहा है ।

अरे आजकल तो दही तक chemical डालकर बनाया जाता है , जो पहले जामन से बनाया जाता था जो बिल्कुल organic और natural पद्धति से बनता था ।

धनिया , पुदीना अगर घर में आ बस जाता था तो पूरा घर महकता था । लेकिन आज .....
चने का साग इतना खट्टा होता था कि चटकारे लगा कर खाया जाता था लेकिन अब ......

बहुत दुख होता है कि हम कहाँ से कहाँ आ गए । और हैरानी की बात यह है कि इसी को हम क्रमिक विकास और आधुनिकता का नाम देते हैं।

हवा , पानी , जल , नदी , झरना , वनस्पति , आकाश, मिटी इत्यादि कोई एक भी ऐसा तत्व बता दे जिसको हमने ज़हर न बना दिया हो ।

हमने विनाश का दरवाजा स्वयं खोल दिया है ।
लेकिन यही तथाकथित विकास है और आधुनिकता की सीढ़ी है ।

पछतायेगा पछतायेगा , फिर गया समय नहीं आएगा ।

06/04/2024

एक बार कुछ scientists ने एक बड़ा ही interesting experiment किया..
उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से cage में बंद कर दिया और बीचों -बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे..
जैसा की expected था, जैसे ही एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा..
पर जैसे ही उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं उस पर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी और उसे उतर कर भागना पड़ा..
पर experimenters यहीं नहीं रुके,
उन्होंने एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी दे डाली और सभी को ठन्डे पानी से भिगो दिया..
बेचारे बन्दर हक्के-बक्के एक कोने में दुबक कर बैठ गए..
पर वे कब तक बैठे रहते,
कुछ समय बाद एक दूसरे बन्दर को केले खाने का मन किया..
और वो उछलता कूदता सीढ़ी की तरफ दौड़ा..
अभी उसने चढ़ना शुरू ही किया था कि पानी की तेज धार से उसे नीचे गिरा दिया गया..
और इस बार भी इस बन्दर के गुस्ताखी की सज़ा बाकी बंदरों को भी दी गयी..
एक बार फिर बेचारे बन्दर सहमे हुए एक जगह बैठ गए...
थोड़ी देर बाद जब तीसरा बन्दर केलों के लिए लपका तो एक अजीब वाक्य हुआ..
बाकी के बन्दर उस पर टूट पड़े और उसे केले खाने से रोक दिया,
ताकि एक बार फिर उन्हें ठन्डे पानी की सज़ा ना भुगतनी पड़े..
अब experimenters ने एक और interesting चीज़ की..
अंदर बंद बंदरों में से एक को बाहर निकाल दिया और एक नया बन्दर अंदर डाल दिया..
नया बन्दर वहां के rules क्या जाने..
वो तुरंत ही केलों की तरफ लपका..
पर बाकी बंदरों ने झट से उसकी पिटाई कर दी..
उसे समझ नहीं आया कि आख़िर क्यों ये बन्दर ख़ुद भी केले नहीं खा रहे और उसे भी नहीं खाने दे रहे..
ख़ैर उसे भी समझ आ गया कि केले सिर्फ देखने के लिए हैं खाने के लिए नहीं..
इसके बाद experimenters ने एक और पुराने बन्दर को निकाला और नया अंदर कर दिया..
इस बार भी वही हुआ नया बन्दर केलों की तरफ लपका पर बाकी के बंदरों ने उसकी धुनाई कर दी और मज़ेदार बात ये है कि पिछली बार आया नया बन्दर भी धुनाई करने में शामिल था..
जबकि उसके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था!
experiment के अंत में सभी पुराने बन्दर बाहर जा चुके थे और नए बन्दर अंदर थे जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था..
पर उनका behaviour भी पुराने बंदरों की तरह ही था..
वे भी किसी नए बन्दर को केलों को नहीं छूने देते..
Friends, हमारी society में भी ये behaviour देखा जा सकता है..
जब भी कोई नया काम शुरू करने की कोशिश करता है,
चाहे वो पढ़ाई , खेल , एंटरटेनमेंट, business, राजनीती, समाजसेवा या किसी और field से related हो, उसके आस पास के लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं..
उसे failure का डर दिखाया जाता है..
और interesting बात ये है कि उसे रोकने वाले maximum log वो होते हैं जिन्होंने ख़ुद उस field में कभी हाथ भी नहीं आज़माया होता..
इसलिए यदि आप भी कुछ नया करने की सोच रहे हैं और आपको भी समाज या आस पास के लोगों का opposition face करना पड़ रहा है तो थोड़ा संभल कर रहिये..
अपने logic और guts की सुनिए..
ख़ुद पर और अपने लक्ष्य पर विश्वास क़ायम रखिये..
और बढ़ते रहिये..
कुछ बंदरों की ज़िद्द के आगे आप भी बन्दर मत बन जाइए..

जुकरबर्ग की पत्नी प्रिसिला चान ने नीता अंबानी का 500 करोड़ वाला नेकलेस देखा। ओर मार्क ज़ुक़रबर्ग से कहा- मुझे भी ये वाला...
06/03/2024

जुकरबर्ग की पत्नी प्रिसिला चान ने नीता अंबानी का 500 करोड़ वाला नेकलेस देखा।
ओर मार्क ज़ुक़रबर्ग से कहा- मुझे भी ये वाला हार चाहिए।

ज़ुक़रबर्ग ने इतना महंगा हार दिलाने से मना किया तो प्रिसिला ने फेसबुक सर्वर रूम में घुसकर तार खींच दिया।

इसके चलते ही रात को फ़ेसबुक और इंस्टा बन्द हो गया था।

रात को फेसबुक इंस्टा में टेक्निकल समस्या नही थी बल्कि जुकरु के घर का गृहकलेश था😊

13/12/2023
11/12/2023

किसने लिखा पता नहीं पर लिखने वाले ने बहुत ही गज़ब का लिखा है। बहुत बारीकी से observations किये हैं

👌👌👌👌👌
"मिडिल-क्लास" का होना भी
किसी वरदान से कम नहीं है.
कभी बोरियत नहीं होती.

जिंदगी भर कुछ ना कुछ आफत
लगी ही रहती है.

मिडिल क्लास वालों की स्थिति
सबसे दयनीय होती है,

न इन्हें तैमूर जैसा बचपन नसीब होता है
न अनूप जलोटा जैसा बुढ़ापा, फिर भी
अपने आप में उलझते हुए
व्यस्त रहते हैं.

मिडिल क्लास होने का भी
अपना फायदा है.
चाहे BMW का भाव बढ़े या AUDI का
या फिर नया i phone लाँच हो जाये,
कोई फर्क नहीं पड़ता.

मिडिल क्लास लोगों की
आधी जिंदगी तो ... झड़ते हुए बाल
और बढ़ते हुए पेट को रोकने में ही
चली जाती है.

इनके यहाँ फ्रूटी, कोल्ड ड्रिंक
एक साथ तभी आते हैं , जब घर में कोई
बढ़िया वाला रिश्तेदार आ रहा होता है.

मिडिल क्लास वालों के यहाँ
कपड़ों की तरह ही
खाने वाले चावल की भी
तीन वेराईटी होती है ~
डेली, कैजुवल और पार्टी वाला.

छानते समय चायपत्ती को दबा कर
लास्ट बून्द तक निचोड़ लेना ही
मिडिल क्लास वालों के लिए
परमसुख की अनुभुति होती है.

ये लोग रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल
नहीं करते, सीधे
अगरबत्ती जला लेते हैं.

मिडिल क्लास भारतीय परिवार के
घरों में Get together नहीं होता,
यहाँ 'सत्यनारायण भगवान की'
कथा होती है.

इनका फैमिली बजट इतना
सटीक होता है, कि सैलरी अगर
31 के बजाय 1 को आये, तो
गुल्लक फोड़ना पड़ जाता है.

मिडिल क्लास लोगों की
आधी ज़िन्दगी तो
"बहुत महँगा है" बोलने में ही
निकल जाती है.

इनकी "भूख" भी ...
होटल के रेट्स पर डिपेंड करती है.
दरअसल महंगे होटलों की मेन्यू-बुक में मिडिल क्लास इंसान
'फूड-आइटम्स' नहीं बल्कि
अपनी "औकात" ढूंढ रहा होता है.

इनके जीवन में कोई वैलेंटाइन नहीं होता.
"जिम्मेदारियाँ" जिंदगी भर
परछाईं की तरह पीछे लगी रहती हैं.

मध्यम वर्गीय दूल्हा-दुल्हन भी
मंच पर ऐसे बैठे रहते हैं मानो जैसे
किसी भारी सदमे में हों.

अमीर शादी के बाद
चलता बनते हैं , और
मिडिल क्लास लोगों की शादी के बाद
टेन्ट बर्तन वाले पीछे पड़ जाते हैं.

मिडिल क्लास बंदे को
पर्सनल बेड और रूम भी
शादी के बाद ही अलाॅट हो पाता है.

मिडिल क्लास ... बस ये समझ लो कि
जो तेल सर पे लगाते हैं , वही तेल
मुँह पर भी रगड़ लेते हैं.

एक सच्चा मिडिल क्लास आदमी
गीजर बंद करके
तब तक नहाता रहता है
जब तक कि नल से
ठंडा पानी आना शुरू ना हो जाए.

रूम ठंडा होते ही AC बंद करने वाला
मिडिल क्लास आदमी चंदा देने के वक्त
नास्तिक हो जाता है, और
प्रसाद खाने के वक्त आस्तिक.

दरअसल मिडिल-क्लास तो
चौराहे पर लगी घण्टी के समान है,
जिसे लूली-लगंड़ी, अंधी-बहरी,
अल्पमत-पूर्णमत
हर प्रकार की सरकार
पूरा दम से बजाती है.

मिडिल क्लास को आज तक बजट में
वही मिला है, जो अक्सर हम
🔔 मंदिर में बजाते हैं. 🔔

फिर भी हिम्मत करके
मिडिल क्लास आदमी
पैसा बचाने की
बहुत कोशिश करता है,
लेकिन
बचा कुछ भी नहीं पाता.

हकीकत में मिडिल मैन की हालत
पंगत के बीच बैठे हुए
उस आदमी की तरह होती है
जिसके पास पूड़ी-सब्जी
चाहे इधर से आये, चाहे उधर से
उस तक आते-आते
खत्म हो जाती है.

मिडिल क्लास के सपने भी
लिमिटेड होते हैं.
"टंकी भर गई है, मोटर बंद करना है"
गैस पर दूध उबल गया है,
चावल जल गया है,
इसी टाईप के सपने आते हैं.

दिल में अनगिनत सपने लिए
बस चलता ही जाता है ...
चलता ही जाता है.
और चला जाता है।
*ये मिडिल क्लास आदमी*
💐🌷💐🌷🙏🙏

08/11/2023

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Ward No 12
Bikaner
NOKHA

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+919414546920

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