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भरणी नक्षत्रदूसरे राशिचक्र में 13.20 अक्षाश से 26.40 अक्षाश तक के विस्तार का क्षेत्र भरणी नक्षत्र कहा जाता है। "अरब मंजि...
03/02/2023

भरणी नक्षत्र

दूसरे राशिचक्र में 13.20 अक्षाश से 26.40 अक्षाश तक के विस्तार का क्षेत्र भरणी नक्षत्र कहा जाता है। "अरब मंजिल' के अनुसार यह "अल भुटैन (The little belly) है। ग्रीक इसे "41/35 ऐरिटिस या मुसचाय" मानते हैं जबकि चीन में इसे 'आई' (Oci) कहते हैं। अश्विनी नक्षत्र के पूर्व में स्थित स्त्री योनि के आकार में तीन सितारों का समूह भरणी नक्षत्र का प्रतीक है। भरणी चीनी मिट्टी के कलश को भी कहते हैं। अतः शका उत्पन्न होती है-क्या भरणी नक्षत्र, जैसे की ग्रीक मान्यतानुसार 41 ऐरिटिस अर्थात (41 सितारों वाले कलश) के आकार का होता है? इस विषय में आगे शोध की आवश्यकता है।

इस नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता यम जो कि दिवंगत आत्माओं का शासक है। धारणा है कि यम विवासत का पुत्र है। यह योग की आठ शाखाओं में प्रथम है। वह भगवान शिव का मृत्यु प्रदान करने वाला प्रतिनिधि है।

भरणी नक्षत्र में उत्पन्न जातकों के सामान्य परिणाम

1. शारीरिक गठन- वह मध्यम आकार का, छिदरे वालों वाला, बड़े माये, चमकदार नेत्र और सुन्दर दान्तों का होता है। उसका स्वरूप रक्ताम तथा लम्बी गरदन व चेहरे वाला होता है। यह भी देखा गया है कि दोपहर में जन्म हो तो जातक लम्बे कद का होगा। उसका चेहरा सिर के पास चौड़ा तथा ठोड़ी के पास तंग होगा। उसकी घनी भी होगी।

2. स्वभाव तथा सामान्य घटना भरणी नक्षत्र में उत्पन्न जातक साफ दिल और किसी का भी बुरा न चाहने वाले होने के उपरान्त भी पसन्द नहीं किये जाते वे दूसरों की भावनाओं की परवाह न करते हुए किसी भी विषय 1 पर अपने विचार प्रकट करने की प्रकृति वाले होते हैं। वह चापलूसी करके पाना नहीं चाहता। कुछ भी हो जाए वह हर उस काम को, जो दूसरों की निगाह में कितना ही अच्छा या बुरा क्यों न हो, अपने मन के मानने पर ही करता है। अपनी उसी मनोवृति के कारण उसे असफलताओं और विरोध का सामना करना पड़ता है। वह छोटी से छोटी बात पर भी अपने निकट और प्रिय व्यक्ति से भी नाता तोड़ लेने में नहीं हिचकता लेकिन जब वह अपनी गलती के बारे में कायल कर दिया जाये और उसका विरोधी बलित हो कर आये तो. वह सारी शत्रुता भूल कर पहले से सामान्य हो जाता है।

उसे व्यवहार कौशल नहीं आता। अधीनता की स्थिति से तो वह कोसों दूर रहता है। उसका यह घमण्ड प्रायः उसके लिए विपत्ति का कारण बन जाता है। किसी के सामने झुकना वह मरने के समान समझता है और जब उसे झुकना भी पड़ता है तो यह विषादग्रस्त हो जाता है। सलाह व प्रोत्साहन उसके समक्ष कोई हैसियत नहीं रखते।

प्रायः ऐसे जातकों का ज्ञान बहुत अच्छा होता है। वे किसी भी विषय की गहराई में जाने की क्षमता रखते हैं ये जन-जीवन में चमकते हैं फिर भी उन्हें आलोचना तथा आर्थिक हानि का शिकार होना पड़ता है।

वह दूसरों पर अपनी श्रेष्ठता प्रकट करने और उन पर शासन करने को पसन्द करता है। उसे कदम-कदम पर रूकावटों और सख्त मुकाबला का सामना करना पड़ता है। जिससे उसे प्रायः असफलताओं का मुख देखना पड़ता चाहे दूसरों की नजरों में वह घमण्डी हों लेकिन साफ दिल होते हैं। उनका जीवन उतार-चढ़ाव पूर्ण होता है।

भरणी नक्षत्र में उत्पन्न जातकों को अनावश्यक विवाद और प्रतिस्पद्धजों से बचने की सलाह दी जाती है। उनका अपने सिद्धान्तों पर अड़े रहना उनके लिए मुसीबत का कारण बन जाता है। ये अफवाह बाजी तथा गप्पबाजी के शौकीन होते हैं। जैसे कि पहले कहा गया है कि उनका जीवन उतार चढ़ाव पूर्ण होता है। अतः उनके लिए सदैव एक सा समय नहीं रहता। वे दूसरों की देखभाल करने में सक्षम होते हैं फिर भी वे चाहते हैं कि दूसरे उसकी देखभाल करें। अन्त में उसके मित्र और चाहने वाले उसके विरूद्ध हो जाते हैं। वह किसी से भी स्थायी सम्बन्ध नहीं बना पाता।

3. शिक्षा, रोजगार/आय के साधन-अच्छा या बुरा समय सदा नहीं रहता। 33 वर्ष की आयु के बाद उसके जीवन में, वातावरण में तथा आजीविका में परिवर्तन होगां वह किसी भी कार्य को करने में सक्षम होगा विशेषकर प्रशासनिक कार्य, व्यवसाय, कृषि तथ लघु उद्योग वह संगीत, खेल-कूद, कला-विज्ञापन, वाहन अथवा रस्तेरौ आदि में कमायेगा। यह अच्छा शल्य-चिकित्सक या न्यायाधीश भी बन सकता है। वह तम्बाकू व्यवसाय में सफल हो सकता है। यदि वह अपने निवास की पूर्व दिशा में अपने व्यवसाय का स्थान बनाए अथवा पूर्व दिशा में यात्रा करें तो उसे हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।

5. पारिवारिक जीवन-27 वर्ष की आयु में विवाह, सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए भाग्यशाली उसकी सहचरी गृहकार्यों, प्रशासन और अच्छे आचरण में निपुण होगी। यदि जातक का जन्म भरणी नक्षत्र के प्रथम या द्वितीय चतुर्थाश में हुआ हो तो वह अपने पिता की मृत्यु का कारण बनेगा। उसके बिना सोचे समझे अन्धाधुन्ध खर्च करने की आदत होने पर भी उसकी पत्नी दुर्दिनों के लिए बचा कर रखेगी। वह अपने परिवार से इतना प्रेम करेगा कि उनसे एक दिन भी अलग रहना नहीं चाहेगा।

5. स्वास्थ्य - वह अपने स्वास्थ्य की ओर से लापरवाह होगा फिर भी उसे किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। ज्यादातर दन्तपीड़ा, मधुमेह, शरीर-दर्द, दिमागी चिंताए तेज बुखार, रक्तघात, चमड़ी के रोग, मलेरिया आदि से पीड़ित हो सकता है। वह खाने में बहुत संयमी होगा। जैसा कि धारणा है कि वह जल दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है, उसे जलयात्राओं, नदी-तालाब, सागर आदि में स्नान आदि के दौरान सावधान रहना चाहिए। आंखों के पास माथे पर चोट का चिन्ह वह चैन स्मोकर होगा। अतः उसे अपने फेफड़ो के प्रति सावधान रहना चाहिए।
# astrolife

अश्विनी नक्षत्र फलराशि चक्र में 0.00 डिग्री से 13.20 डिग्री तक का विस्तार क्षेत्र अश्विनी नक्षत्र कहलाता है। हिन्दु पौरा...
02/02/2023

अश्विनी नक्षत्र फल

राशि चक्र में 0.00 डिग्री से 13.20 डिग्री तक का विस्तार क्षेत्र अश्विनी नक्षत्र कहलाता है। हिन्दु पौराणिक कथा के अनुसार "अश्विनी" नाम, दो "अश्विन" से उत्पन्न हुआ है। ग्रीक में इसको "Castor and Pollux", अरब मंजिल (Arab Manzil) में अप-पराटण (Ash-Sharatan) और चीनियों का "Sieu" में "Leu" जाना जाता है। 'चकलव' तथा 'खण्ड-काटक' के अनुसार अश्विनी समूह दो अश्विनियों के प्रतीक दो सितारों का समूह है। कोलबुक तथा बाद की धारणाओं के अनुसार अश्विनी नक्षत्र समूह दो अश्व के मुख के प्रतीक तीन सितारों का समूह है।

अश्विनी नक्षत्र का अधिष्ठाता स्वामी 'दो अश्विन है। अश्विन के दो भुजाएं होती हैं तथा ये सूर्य तथा सविता के वाहन हैं। एक अन्य मतानुसार ये देवताओं के चिकित्सक हैं। वेदों के अनुसार सृष्टि के आरम्भ में केवल सृष्टा था, जो प्रजा तथा पालक दोनों का पार्ट अदा करता था/ अर्थात सृष्टा ही प्रजा तथा पालक दोनों रूपों में विद्यमान था और उसे उद्देश्यहीनता का सामना करना पड़ता था। अपनी इस एकान्तता की स्थिति से बचने के लिए सृष्टा ने विभिन्न रूपों की रचना की जो देवता कहलाये। इन रूपों में प्रथम कृति दो भुजाओं वाले अश्विन थी।

1 अश्विनी नक्षत्र में उत्पन्न जातकों के सामान्य परिणाम है

1. शारीरिक गठन- अश्विनी नक्षत्र में उत्पन्न जातक सुन्दर मुखाकृति के, चमकदार तथा बड़ी आँखों वाले, माया चौड़ा तथा नासिका कुछ बड़ी होती

2. स्वभाव तथा सामान्य घटना- इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक ज्ञान्त स्वभाव वाले होते हैं। वे अपना कार्य चुपचाप, बिना किसी को जताये, करते हैं। वे अपने निर्णयों में हट्टी किस्म के होते हैं। विशेषकर 14 से 28 अप्रैल के बीच उत्पन्न जातकों में यह हठीलापन कुछ अधिक होता है। इस काल में सूर्य अपने उच्च स्थान में चलता रहता है तथा 14 से 28 अक्टूबर के बीच

नक्षत्र फल सूर्य अपने नीच स्थान स्वाति नक्षत्र पर चलता रहता है। यह धारणा है कि मृत्यु का देवता 'म' भी इस प्रभाव से बच्छ नहीं सकता। अन्य महीनों में अश्विनी नक्षत्र में उत्पन्न व्यक्तियों में यह हटीलापन कम मात्रा में पाया जाता है।

ये जातक अपने से प्रेम करने वालों पर सब कुछ कुर्बान कर देने वाले होते हैं। ये विपत्तियों में भी घबराने वाले नहीं होते बल्कि विपत्तियों में घिरे अन्य लोगों की मदद करते हैं। लेकिन ये अपनी विवेचना सहन नहीं कर पाते और बुरा मानते है।

ये जातक अपना कार्य अपने ढंग से, सोच विचार कर करता है तथा किसी से भी प्रभावित नहीं होता। जब वह किसी कार्य को करने की धारणा बना लेता है तो कुछ भी परिणाम निकले, वह करके रहता है।

वह भगवान में दृढ़ विश्वास रखता है लेकिन धर्मान्ध नहीं होता। वह

अपने रूढ़ीवादी विचारों के प्रति आधुनिक होता है। यद्यपि वह बुद्धिमान होता है मगर अक्सर मामलों को तूल देता है,

जिस कारण वह मानसिक परेशानी में पड़ जाता है। वह सदैव अपने वातावरण

को अपने अनुकूल बनाने का इच्छुक होता है।

यदि उसका जन्म अश्विनी नक्षत्र के 2.00 से 3.00 डिग्री के बीच हुआ है तो वह बिना बात के हठीला होगा और परिणामतय चोरी या तस्करी के कार्य करेगा। यदि अन्य विलय ठीक भी हो तो उसके पास धन तो होगा लेकिन वह उसका उपभोग नहीं कर सकेगा। वह अपने परिवार के लिए बदनामी का भी कारण बनेगा।

3. शिक्षा, रोजगार / आय के साधन-जातक हर काम में उस्ताद होता हैं। वह प्रायः संगीत का शौकीन तथा साहित्य प्रेमी होता है। 30 वर्ष की आयु तक उसका जीवन संघर्षपूर्ण होता है और उसे छोटी-छोटी बातो के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद 55 वर्ष की आयु तक इसके जीवन में निरन्तर उन्नति होगी।

उसके स्वाभाव की एक विशेषता यह भी है कि वह कृपण होता है लेकिन अपनी शान दिखाने के लिए आय से ज्यादा खर्च कर बैठता है। वह अपनी जरूरतों को किसी भी कीमत पर पूरा करने का निरन्तर प्रयत्न करता रहता है।
अश्विनी नक्षत्र का प्रथम चरण
लग्न या चंद्रमा, अश्विनी नक्षत्र के प्रथम चरण में आता हो तो ऐसा व्यक्ति लम्बे मुख का होता है. उसकी कनपटियां उभरी हुई होती हैं, नाक छोटी होगी, हाथ मझले या सामान्य से छोटे हो सकते हैं, आवाज में भारीपन हो सकता है, साधारण नैन नक्श, छोटी मुंदी हुई सी आंखें हो सकती हैं, शरीर में चर्बी कम हो, पतला हो सकता है.

अश्विनी नक्षत्र का दूसरा चरण
लग्न या चंद्रमा, अश्विनी नक्षत्र के दूसरे चरण में आता हो तो कंधे भारी और मांसल युक्त हो सकते हैं. भुजाएं भरी हुई होगी, लम्बोतर मुख, नाक पर हल्का सा सांवलापन हो सकता है, पैरों के टखने कम उभरे हुए होगे, माथा छोटा हो सकता है, आँखें बडी़ और साफ होंगी, आवाज़ में कोमलता हो सकती है.

अश्विनी नक्षत्र का तीसरा चरण
लग्न या चंद्रमा, अश्विनी नक्षत्र के तीसरे चरण में आता हो तो व्यक्ति के बाल कम हो सकते हैं, आंशिक गंजापन हो सकता है, गौर वर्ण होगा, शरीर से भुजाएं थोड़ा हटाकर चलने की आदत हो सकती है, आंखें सुंदर और नाक सुघड़ होती है, बोल-चाल में कुशल होता है, जांघे पतली होती है और घुटने अधिक उभरे हुए नही होते हैं.

वैदिक ज्योतिष में बुध को वाणी का भी कारक माना जाता है ज्योतिष के मुताबिक सूर्य और शुक्र बुध के मित्र हैं।जबकि चंद्रमा और...
28/01/2023

वैदिक ज्योतिष में बुध को वाणी का भी कारक माना जाता है ज्योतिष के मुताबिक सूर्य और शुक्र बुध के मित्र हैं।
जबकि चंद्रमा और मंगल इसके शत्रु है यदि बुध का प्रभाव देखा जाए तो जिस जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह लग्न भाव में स्थित हो वह व्यक्ति शारीरिक रूप से सुंदर होता है ।
जातक अपनी वास्तविक उम्र से काफी कम उम्र का दिखाई देता है तथा उसकी आंखें चमकदार होती है ।
ज्योतिष के मुताबिक जातक की कुंडली में लग्न में बुध हो तो जातक स्वभाव से तर्कसंगत और बौद्धिक रूप से धनी तथा कुशल वक्ता बनाता है ।
किसी जातक की कुंडली में बुध ग्रह प्रभावी है तो जातक के संवाद शैली कुशल होती है वह हाजिरी जवाबी होता है। जातक अपनी बातों से सब को मोह लेता है ।
बली बुध के कारण जातक कुशाग्र बुद्धि वाला होता है ऐसे जातक वाणिज्य और कारोबार में सफल होते हैं ।
इसके साथ ही यह जातक संवाद और संचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हैं यदि जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह किसी क्रूर अथवा पापी ग्रहों से पीड़ित है तो जातक के लिए सही नहीं है ।
ऐसा होने से जातक को शारीरिक और मानसिक रूप से समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिसके कारण जातक अपने विचारों का स्पष्ट में नहीं रख पाता है पीड़ित बुध के प्रभाव से व्यक्ति को कारोबार में हानि सामना करना पड़ता है
बुध आपके पक्ष में रहे तो आपको मालामाल कर देगा. आपको यश बल कीर्ति से आकाश की अनंत ऊंचाइयों तक पहुंचा देगा और अगर उसने नजर फेर ली तो आपको पाई पाई का मोहताज कर सकता है.
ऐसे में हर इंसान यही चाहेगा कि उसका बुध हमेशा शुद्ध रहे. उस पर अपनी अच्छी नजर बनाए रखें. लेकिन कैसे आखिर क्या करें कि बुद्ध की शुद्ध दृष्टि ही हम पर पड़े या अगर बुध कमजोर हो तो फिर उसे कैसे मजबूत करके जीवन को संवारा जा सकता है.
कुंडली में बुध अगर कमजोर हो तो समस्याएं व्यापक हो जाती हैं. बुध के कमजोर होने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और वाणी में दोष आ जाता है. साथ ही बुध के कमजोर होने से इंसान की सुंदरता भी प्रभावित होती है
ज्योतिष में बुध ग्रह शांति के लिए सबसे अच्छा पन्ना रत्न माना जाता है. अगर आपका बुध अशांत है तो किसी ज्योतिषाचार्य की सलाह पर आप पन्ना धारण कर सकते हैं. बुध प्रधान राशि मिथुन और कन्या के जातकों के लिए पन्ना रत्न बेहद शुभ होता है. बुधवार के दिन श्री विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र का जाप करें।
मां दुर्गा चालीसा पाठ करें।

संपर्क करें -9705642222

03/01/2023
 #सिंहद्वारसिंह द्वार और मुख्य प्रवेश द्वार गृह स्वामी की राशि के अनुसार , मुख्य द्वार बनाने की अपेक्षा अनुकूल स्थिति को...
04/01/2022

#सिंहद्वार
सिंह द्वार और मुख्य प्रवेश द्वार गृह स्वामी की राशि के अनुसार , मुख्य द्वार बनाने की अपेक्षा अनुकूल स्थिति को देखकर उसे बनाना कहीं उचित है , क्योंकि मकान की संरचना उस विशेष व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी बनी रहती है और अन्य लोग उसमें निवास करते रहते हैं ।
द्वार की शुभ स्थितियां निम्नलिखित है :
1.उत्तर उत्तर - पूर्व ( शुभ ) आर्थिक लाभ प्रदान करता है !
2.पूर्व उत्तर - पूर्व ( शुभ ) - ज्ञान उपलब्ध कराता है ।

3.दक्षिण दक्षिण - पूर्व ( इतना शुभ नही । ) -यदि दूसरा द्वार उत्तर या पूर्व में लगाया जाय तो लाभदायक होता है ।
4.पश्चिम उत्तर - पश्चिम ( शुभ ) - सफलता प्रदान करता है ।
5.उत्तर उत्तर - पश्चिम ( अशुभ ) अस्थिरता लाता है ।
6.पूर्व दक्षिण - पूर्व ( अशुभ ) विपरीत प्रभाव डालने का कारण बनता है ।
7.दक्षिण दक्षिण - पश्चिम ( अशुभ ) आर्थिक हानि तथा महिलाओं के लिए स्वास्थ्य हानि !

8.पश्चिम दक्षिण - पश्चिम ( अशुभ ) आर्थिक हानि तथा पुरुषों के पतन का कारण बनता है ।

द्वारों की संख्या : द्वारों की संख्या सम होनी चाहिए विषम नहीं , जैसे 2,4,6,8,12 आदि । द्वारों की 10 संख्या शुभ नहीं क्योंकि इसका अंत शून्य ( 0 ) में होता है । लेकिन यह गृहस्वामियों पर कोई अधिक गंभीर प्रभाव नहीं डाल सकता फिर भी इस ही उचित है । खिड़कियों और रोशनदानों की संख्या भी सम होनी चाहिए विषम नहीं ।

वास्तुशास्त्र के अनुसार, आपके घर के सामने पेड़ या खंभा नहीं होना चाहिए, इसकी छाया अशुभ प्रभाव डालती है। अगर ऐसा है तो घर के मेन गेट पर रोज स्वास्तिक बनाएं। साथ ही मेन गेट के आस-पास तुलसी का पौधा होना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में प्रवेश करने वाली सारी नकारात्मक ऊर्जा, सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाती है।

Wooden cold pressed sesame oil benefits
17/07/2021

Wooden cold pressed sesame oil benefits

Wooden cold pressed sesame oil benefits
Used
The aroma of sesame oil is unmistakable. It is widely used in Asian cooking. From dips to being the base for recipes, sesame oil can be used in many ways. Be it sauteed veggies or adding depth of flavor to noodles.

Sesame oil is a must-have ingredient in homes in Tamil Nadu.

Ayurveda uses it to ease stress-related symptoms. It is also used in massages. Sesame oil’s antibacterial properties make it great for oral hygiene! This is often referred to as oil pulling.

Just as it's great for your skin, it's good for your hair as well. It can help nourish your hair and scalp.

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The presence of Vitamin E makes it great for your hair and skin. Nutrients such as Zinc, Copper, Magnesium and Calcium attribute to many benefits. Zinc helps to improve bone health while Copper gives relief to arthritis.

There is a high concentration of polyunsaturated fatty acids which helps to reduce blood pressure. Lignan, a natural preservative present in the oil has also been shown to lower blood pressure.

A high concentration of Omega-6 fatty acids makes it great as a moisturizer and as a massage oil. A perfect de-stressor after a long day!

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