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20/08/2026
20/08/2026

सभी तरह के कीड़ो और फंगस के लिए 2 फ्री के पेस्टिसाइड,बरसात मे जरूर डालें + 2 Free Pesticides for All Plants

20/08/2026

✅️ज्यादातर लोगो की ये चिंता है की तुलसी पर काले कीड़े लग जाते हैं ठंड मे पते सूखे बेजान से हो जाते हैं उन्हे कैसे ठीक किया जाये,आज के इस पोस्ट मे जो उपाय बता रही हुँ वो जरूर अपनायें और post अच्छी लगे तो like ,share & follow जरूय करें👇
#एक चम्मच कच्चा दूध एक लिटर पानी में डालकर तुलसी जी के पतो पर अच्छे से स्प्रे करें इससे पते हरेहरे ,ग्रोथ तेज होगी।काले कीड़े एकबार मे ही गायब होंगे
#तुलसी मे रोज-रोज पानी ना दें खासकर ठंड मे,एक नियम बनायें की सप्ताह मे 2 बार पानी डालें
#गुड़ाई जरूर करते रहे गमले में
#राख मे हल्दी मिलाकर पतो पर रात को छिड़क दें काले कीड़े गायब हो जायेंगे
#तुलसी

20/08/2026

सितम्बर मे ये परमानेंट पौधे नर्सरी से लेना ना भूलें👇

घर में बागवानी करते समय कई लोग रसोई के कचरे का उपयोग पौधों के लिए खाद के रूप में करते हैं। इनमें से सबसे लोकप्रिय है चाय पत्ती। यह आसानी से उपलब्ध, सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल होने के कारण बागवानों की पहली पसंद है। प्रयोग की गई उबली हुई चाय पत्ती में नाइट्रोजन, पोटैशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, मैंगनीज और अन्य सूक्ष्म खनिज पाए जाते हैं, जो पौधों की वृद्धि और पत्तों की हरियाली में मदद करते हैं। हालाँकि, सही तरीका और मात्रा का पालन न करने पर यह पौधों के लिए हानिकारक भी हो सकती है। इस लेख में हम जानेंगे कि चाय पत्ती का वैज्ञानिक और सुरक्षित उपयोग कैसे करें।

🔸 चाय पत्ती में मौजूद प्रमुख पोषक तत्व

🔹 नाइट्रोजन 4% - पत्तियों की हरियाली और नई वृद्धि
🔹पोटैशियम .25% - फूल, फल और पौधों की मजबूती
🔹 फॉस्फोरस .2% - जड़ों की मजबूती और विकास
🔹 मैग्नीशियम - प्रकाश संश्लेषण में सहायता
🔹 मैंगनीज - एंजाइम सक्रियता, पत्तों का स्वास्थ्य

🔸 चाय पत्ती का प्रयोग कैसे करें

1) केवल प्रयोग की गई (उबली हुई) चाय पत्ती लें

◆ चाय बनाने के बाद बची हुई पत्ती को अच्छी तरह धो लें ताकि दूध, चीनी और मसाले हट जाएँ।

◆ बिना धोए पत्ती में चीनी व दूध हानिकारक कीट और फफूंद को बढ़ा सकते हैं।

2) सूखाकर खाद में मिलाएँ

◆ धोई हुई पत्ती को धूप में सुखाकर सीधे गमले की मिट्टी में मिलाएँ।
◆ 5–10% अनुपात से अधिक न डालें (यानी 1 गमला मिट्टी = मुट्ठीभर सूखी पत्ती)।

3) कम्पोस्ट के साथ प्रयोग

◆ चाय पत्ती को सब्जियों के छिलके, पत्तियों और अन्य जैविक कचरे के साथ कम्पोस्ट करें।
◆ इसमें मौजूद सूक्ष्मजीव कम्पोस्टिंग प्रक्रिया को तेज करते हैं और केंचुए आकर्षित होते हैं, जो मिट्टी को मुलायम और पोषक बनाते हैं।

4) तरल खाद

◆ धोई हुई पत्तियों को पानी में 48–72 घंटे भिगोएँ।
◆ इसमें घुलनशील पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीव विकसित होते हैं।
◆ पानी छानकर पौधों में डालें; ठोस हिस्सा कम्पोस्ट में डाल दें।

5) मात्रा और अंतराल

◆ मौसम - गर्मी - 15–20 दिन में 1 बार
◆ मात्रा - छोटे गमले में मुट्ठीभर सूखी पत्ती / 250ml तरल
◆ मौसम - गर्मी - 25–30 दिन में 1 बार
◆ मात्रा - छोटे गमले में मुट्ठीभर सूखी पत्ती / 250ml तरल
◆ फूल आने का समय - आधी मात्रा रखें

🔸 चाय पत्ती के उपयोग को बेहतर बनाने के तरीके

🔹 नीम खली के साथ मिलाएँ – कीट और फफूंद का खतरा घटेगा।
🔹 वर्मी कम्पोस्ट में डालें – पोषण क्षमता बढ़ेगी।
🔹 लकड़ी की राख, बोन मील, केले के छिलके के साथ मिलाकर संतुलित जैविक खाद बन सकती है।

🔸 फायदे

✅ नाइट्रोजन का अच्छा स्रोत – पत्तों की हरियाली और नई वृद्धि।
✅ सूक्ष्म पोषक तत्वों की आपूर्ति – पोटैशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, मैंगनीज।
✅ कम्पोस्टिंग में तेजी – सूक्ष्मजीव सक्रिय करते हैं।
✅ पर्यावरण-अनुकूल – रसोई के कचरे का पुनः उपयोग।

🔸 नुकसान और सावधानियाँ

⚠ मिट्टी का pH घटा सकता है – अधिक प्रयोग से अम्लीयता बढ़कर जड़ों को नुकसान पहुँचा सकती है।
⚠ फफूंद/कीट आकर्षण – गीली पत्ती सीधे डालने पर।
⚠ चीनी/दूध हानिकारक – मिट्टी में हानिकारक जीवाणु बढ़ाते हैं।
⚠ अपूर्ण खाद – केवल चाय पत्ती पर निर्भर न रहें; अन्य खाद भी जरूरी है।

🔸 किन पौधों में प्रयोग अच्छा/कम करें

✅ अच्छा असर
🔹 गुलाब, मोगरा, हिबिस्कस, गेंदा, फर्न
🔹 मनी प्लांट, पीस लिली
🔹 इनडोर पत्तेदार पौधे

🚫 प्रयोग कम करें / न करें
⚠ रसीले पौधे, कैक्टस
⚠ पालक, टमाटर, मिर्च, भिंडी
⚠ अम्लीयता-संवेदनशील पौधे

🔸 सामान्य गलतियाँ

❌ बिना धोए दूध-चीनी वाली पत्ती डालना।
❌ हर हफ्ते डालना जिससे pH बिगड़े।
❌ गीली पत्ती मिट्टी पर छोड़ देना – कीट लगते हैं।

🔸 निष्कर्ष
सही तरीके से उचित मात्रा में इस्तेमाल की गई चाय पत्ती पौधों के लिए एक सस्ती, जैविक और पर्यावरण-अनुकूल पोषक खाद है। लेकिन इसे संतुलित रूप से और अन्य खादों के साथ मिलाकर ही प्रयोग करें, ताकि पौधों को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलें और वे लंबे समय तक हरे-भरे रहें।

अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ साझा करें। अपने अनुभव, सुझाव या प्रश्न नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें। हम हर प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं।

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20/08/2026

✅️पौधे में यूरिया डालने से उसे आवश्यक नाइट्रोजन मिलती है, जिससे पौधे हरे-भरे, मजबूत होते हैं और उनकी उपज बढ़ती है। नाइट्रोजन पत्तियों में हरा रंग लाने वाले क्लोरोफिल के निर्माण के लिए ज़रूरी है, जिससे पौधे स्वस्थ्य रहते हैं। हालांकि, यूरिया का अधिक उपयोग जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, मिट्टी को बंजर बना सकता है, और खरपतवारों की वृद्धि बढ़ा सकता है, इसलिए इसका संतुलित मात्रा में प्रयोग करना महत्वपूर्ण है।

💁🏼‍♀️अकसर खेती में हम एक नाम सुनते है “यूरिया” आख़िर ये होता क्या है ?
तो आज हम जानेगे यूरिया का इस्तेमाल क्या है ?? इस्तेमाल और इसके बारे में बहुत कुछ जरूर जानकारी👇

👉🏻यूरिया कैसे बनता है:
यूरिया एक ऐसा उर्वरक है जो किसानों के लिए बहुत ज़रूरी है। यह फसलों को नाइट्रोजन देता है, जिससे पौधों की पत्तियाँ और तने मज़बूत होते हैं और पैदावार बढ़ती है। आइए, बहुत ही आसान भाषा में समझें कि यूरिया कैसे बनता है, ताकि हर किसान इसे समझ सके।

👉🏻यूरिया कैसे बनता है?
यूरिया कारखानों में बनाया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया को चरणों में समझते हैं:

1. पहला चरण: अमोनिया बनाना
- सबसे पहले प्राकृतिक गैस (जैसे मीथेन) से हाइड्रोजन निकाला जाता है। यह गैस ज़मीन से मिलती है।
- फिर इस हाइड्रोजन को हवा में मौजूद नाइट्रोजन के साथ मिलाया जाता है।
- दोनों को मिलाने से अमोनिया (NH3) बनता है। यह एक तरह का रसायन है, जो यूरिया बनाने का मुख्य हिस्सा है।

2. दूसरा चरण: यूरिया बनाना
- अब अमोनिया को कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के साथ मिलाया जाता है। यह गैस कारखानों में बनती है या हवा से ली जाती है।
- इस मिश्रण को बहुत ज़्यादा गर्मी (उच्च तापमान) और दबाव में रखा जाता है। इससे यूरिया के छोटे-छोटे क्रिस्टल बनते हैं।

3. तीसरा चरण: दाने बनाना और पैकिंग
- इन यूरिया क्रिस्टल को सुखाया जाता है, ताकि वे नमी खो दें।
- फिर इन्हें छोटे-छोटे सफेद दानों का आकार दिया जाता है, जो आप खेतों में इस्तेमाल करते हैं।
- इन दानों को बैग में पैक करके बाज़ार में भेजा जाता है, ताकि किसान इन्हें खरीद सकें।

👉🏻किसान यूरिया क्यों इस्तेमाल करते हैं?
पौधों की मज़बूती: यूरिया में नाइट्रोजन होता है, जो पौधों की पत्तियों और तनों को हरा-भरा और मज़बूत बनाता है।
ज़्यादा पैदावार: यह फसलों की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है।
आसान इस्तेमाल: यूरिया के दाने छोटे और हल्के होते हैं, जिन्हें खेत में बिखेरना, ले जाना और स्टोर करना आसान है।

👉🏻किसानों के लिए ज़रूरी सलाह:
ज़्यादा इस्तेमाल से बचें: अगर आप बहुत ज़्यादा यूरिया डालेंगे, तो मिट्टी खराब हो सकती है और उसकी ताकत कम हो सकती है।
संतुलन बनाएँ: यूरिया के साथ गोबर, खाद या अन्य उर्वरकों का भी इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ रहेगी।
सही समय पर डालें: यूरिया को सही समय और सही मात्रा में डालने से फसल को सबसे ज़्यादा फायदा होता है।

यूरिया बनाना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें प्राकृतिक गैस, हवा और रसायनों का इस्तेमाल होता है। यह किसानों के लिए फसलों की पैदावार बढ़ाने का सस्ता और आसान तरीका है। लेकिन इसका सही और संतुलित इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है, ताकि मिट्टी और फसल दोनों स्वस्थ रहें 👍🏻👍🏻

20/08/2026

#ज्यादातर लोगो की ये चिंता है कि उनके तुलसी के पौधे मे ग्रोथ ना के बराबर हो रही है तो ये एक चीज डालकर आप अपने तुलसी के पौधे मे ग्रोथ बहुत तेजी से करा सकते हैं👇
#आधा चम्मच एप्सम साॅल्ट को एक लिटर पानी मे घोल कर तुलसी के पौधे पर अच्छे से स्प्रे करें,3/4दिनो मे हरे पते दिखाई पड़ने लगेंगे👇
#तुलसीकापौधा #पौधा
इस खाद को खरिदने का लिंक comment section मे दिया हुआ है वहां से ले सकते हैं

👉इस खाद को खरिदने का लिंक निचे काॅमेंट सेक्शन मे दिया हुआ है,👇

20/08/2026



✅️नींबू का पौधा समय और देखभाल के साथ भरपूर फल देता है।आपके घर या खेत में नींबू का पौधा तो है, लेकिन उसमें फल नहीं लग रहे, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. यह समस्या आम है और आप थोड़ी सी देखभाल तथा सही तकनीकों से इसका समाधान पा सकते हैं। खासकर बरसात के मौसम में पौधे पर अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

🔹नींबू के पौधे के न बढ़ने या फल न देने के कई कारण हो सकते हैं. सबसे बड़ी वजह पोषक तत्वों की कमी है, जिससे पौधा तो हरा-भरा रहता है लेकिन फल नहीं देता. इसके अलावा मौसम का प्रभाव, ज्यादा बारिश और अत्यधिक धूप या कम तापमान भी फूल और फल बनने की प्रक्रिया रोक देते हैं.

🔹बरसात में नींबू के पौधे की देखभाल शुरू करने के लिए सबसे पहले मिट्टी की जांच जरूरी है. इसके अलावा पौधे की जड़ के पास हल्की गुड़ाई करें और देखें कि दीमक, चींटियां या अन्य कीट तो नहीं हैं. अगर कीट मिलें तो पुरानी मिट्टी हटाकर नई भुरभुरी मिट्टी और हल्का कीटनाशक डालें.

🔹पानी की अधिकता नींबू के पौधे के लिए हानिकारक हो सकती है। बरसात के समय रोजाना पानी देने की जरूरत नहीं होती. पहले मिट्टी की नमी जांच लें और केवल तभी पानी दें जब मिट्टी सूखी हो।इसके साथ ही पौधे की जड़ों में जलजमाव न हो, इसके लिए उचित निकासी की व्यवस्था करें।

🔹उन्होंने बताया कि फल आने के लिए नींबू के पौधे को संतुलित पोषण की आवश्यकता होती है. नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जरूरी तत्व हैं. रासायनिक खाद की जगह वर्मी कम्पोस्ट और लकड़ी की राख का इस्तेमाल करें. इसके अलावा हर दो से तीन महीने में पौधे के चारों ओर खाद डालकर हल्की गुड़ाई करें ताकि पोषक तत्व अच्छी तरह मिल सके।

🔹नींबू का पौधा मौसमी नहीं बल्कि बारहमासी होता है।नर्सरी से लाई गई कुछ विशेष किस्में एक से दो साल में फल देने लगती है, जबकि सामान्य पौधों को तीन से चार साल का समय लगता है।इसलिए धैर्य रखना भी जरूरी है। समय और किस्म का सही चुनाव करने पर परिणाम बेहतर मिलते हैं।

🔹अगर बरसात के मौसम में इन उपायों को अपनाया जाए तो नींबू का पौधा केवल हरा-भरा ही नहीं रहेगा बल्कि आने वाले सीजन में फल से लद जाएगा. थोड़ी देखभाल और समझदारी से आप अपने बगीचे नींबू की बंपर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं और पौधे को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।

#नींबू #

20/08/2026

✅️बेकिंग सोडा बागवानी में: उपयोग और फायदे

बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) सिर्फ बेकिंग और सफाई तक सीमित नहीं है—यह बागवानी में भी बहुत उपयोगी है। यह सस्ता, गैर-विषैला और आसानी से उपलब्ध है। बेकिंग सोडा पौधों को कीटों से बचाने, फफूंद रोगों को रोकने और पौधों की सेहत सुधारने में मदद करता है। दुनियाभर के माली इसे प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल बागवानी के लिए अपनाते हैं।

यहाँ बागवानी में बेकिंग सोडा के सबसे प्रभावी उपयोग और फायदे बताए गए हैं—साथ ही इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने के तरीके भी दिए गए हैं।
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1. फफूंद रोग नियंत्रण

बेकिंग सोडा पाउडरी मिल्ड्यू और ब्लैक स्पॉट जैसी फफूंद बीमारियों के खिलाफ असरदार है। ये रोग अक्सर खीरा, लौकी, अंगूर और गुलाब जैसे पौधों पर दिखाई देते हैं।

कैसे इस्तेमाल करें:

1 लीटर पानी में 1 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएँ।

इसमें कुछ बूंदें हल्के लिक्विड साबुन (कैस्टाइल या डिश सोप) की डालें।

पत्तियों पर अच्छी तरह छिड़काव करें, खासकर नीचे की तरफ।

हफ़्ते में एक बार नमी या बारिश के बाद छिड़कें।
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. प्राकृतिक कीट निवारक

बेकिंग सोडा बड़े पैमाने पर कीटनाशक नहीं है, लेकिन एफिड्स, स्पाइडर माइट्स और वाइटफ्लाई जैसे नरम शरीर वाले कीटों को दूर रखने में मदद करता है।

स्प्रे विधि:

1 लीटर पानी

1 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा

1 बड़ा चम्मच नीम तेल या ऑलिव ऑयल

कुछ बूंदें डिश सोप

इसे पत्तियों पर छिड़कें जहाँ कीट ज्यादा आते हैं।
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. टमाटर मीठा बनाना (मिट्टी का pH संतुलन)

कुछ माली टमाटर के पौधों के आसपास हल्का बेकिंग सोडा डालते हैं ताकि मिट्टी की अम्लीयता घटे और फल का स्वाद बेहतर हो।

कैसे इस्तेमाल करें:

पौधे के आधार पर 1 छोटा चम्मच से ज्यादा न छिड़कें।

हल्का पानी डालें।

ध्यान रखें—अधिक मात्रा मिट्टी का pH बिगाड़ सकती है।
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4. दरारों में खरपतवार रोकना

पाथवे या फुटपाथ की दरारों में खरपतवार उगने से रोकने के लिए बेकिंग सोडा असरदार है।

कैसे इस्तेमाल करें:

सूखा बेकिंग सोडा दरारों में डालें।

हर कुछ हफ़्तों में दोहराएँ।
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. कम्पोस्ट और बगीचे की दुर्गंध दूर करना

कभी-कभी कम्पोस्ट से बदबू आने लगती है। ऐसे में बेकिंग सोडा मदद करता है।

विधि:

कम्पोस्ट पर हल्की परत में छिड़कें और मिला दें।

अधिक मात्रा न डालें वरना कम्पोस्ट की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
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. औज़ार और गमले साफ करना

बेकिंग सोडा हल्का खुरदुरा होता है और औज़ारों को सुरक्षित तरीके से साफ करता है।

कैसे इस्तेमाल करें:

थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएँ।

ब्रश या स्पंज से औज़ार साफ करें।

अच्छे से धोकर सुखा लें ताकि जंग न लगे।
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. घर पर मिट्टी का pH टेस्ट

बेकिंग सोडा से आप साधारण pH टेस्ट कर सकते हैं।

कैसे करें:

मिट्टी में सिरका डालें—अगर झाग निकले तो मिट्टी क्षारीय है।

मिट्टी में पानी और फिर बेकिंग सोडा डालें—अगर झाग निकले तो मिट्टी अम्लीय है।
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. बगीचे को ताज़ा रखना

नमी और छायादार जगहों पर बदबू आती है, जिसे बेकिंग सोडा कम कर सकता है।

पानी में घोलकर बगीचे की सतहों (पौधों पर नहीं) पर छिड़कें।

सूखा बेकिंग सोडा जूतों, दस्तानों या बिन्स में डाल सकते हैं

सुरक्षित इस्तेमाल के सुझाव

हमेशा पहले थोड़ी जगह पर टेस्ट करें।

अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता बिगड़ सकती है।

केवल घोल बनाकर ही पौधों पर छिड़कें।

घोल को हर हफ़्ते नया बनाएं।
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🌱 #पौधेविकास #बागवानी #सस्टेनेबललिविंग #लोकलफूड #बेकिंगसोडा #ऑर्गेनिक #खेती #किसान #ताज़ाउपज #गार्डनिंग #ट्रेंडिंग

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20/08/2026

#मोगरा और गुलाब के पौधे को स्वस्थ रखने और ढ़ेरो फूल पाने
के लिए फ्री की 10 बेस्ट घरेलू खाद 👇
#केले के छिलके की खाद:- अगर आप केले के छिलकों को
कूड़े में फेंक देते हैं तो ऐसा ना करें। इसमें पोटैशियम और
फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होता हैं, यह पौधे पर फल और
फूल लाने में काफी मदद करता हैं। केले के छिलके को
सूखा लीजिए और फिर बारीक पीसकर पौधे में डालिए या
फिर पानी मे रातभर भिगोकर अगले दिन उस पानी को
मोगरे और गुलाब मे डालें
#चायपत्ती की खाद:- इस्तेमाल की गई चायपत्ती पौधों के
लिए सबसे अच्छा जैविक खाद हैं। इसमें नाइट्रोजन होता हैं
जो गुलाब और मोगरे के रंग को निखारता हैं,एक चम्मच 7 दिनो पर
मोगरे और गुलाब के गमले की मिट्टी मे डालें
#प्याज के छिलके:- अगर मोगरे के पौधे में फूल नहीं आ रहे
हैं या वह जल्दी सूख जाता हैं तो प्याज के छिलकों से बने
फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करें। इससे पौधे की मिट्टी में नमी
बनी रहती हैं और पौधे को सूखने नहीं देता हैं।
#नीम की खली:- यह पौधे को कीट और फंगस से सुरक्षित
रखता हैं और मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता हैं।एक चम्मच 7
दिनो पर डालें
#लकड़ी की राख:- यह कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम
और फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत हैं, जो फूलों के विकास में
काफी सहायक होता हैं,15 दिनो पर एक मुठ्ठी डालें,ज्यादा
डालने से नुकसान हो सकता है
#छाछ (मट्ठा):- छाछ में लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, जो
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और गुलाब और मोगरे की वृद्धि में मदद
करते हैं। एक चम्मच एक लिटर पानी मे घोलकर डालें
#अंडे के छिलके:- यह कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत हैं
जो पौधों की जड़ों को मजबूत करता हैं। अंडे के छिलकों
को पीसकर मिट्टी में मिला दें। पौधों में कुछ दिनों में फूल
आने शुरू हो जायेंगे। मात्रा अपने अनुसार लें
#फिटकरी:- एक लीटर पानी में लगभग 5 ग्राम फिटकरी को
डालकर इसे रात भर के लिए छोड़ दें। अगली सुबह इस
पानी को गुलाब और मोगरे के पौधे में डालें। फिटकरी में एंटीसेफ्टिक
और एंटीफंगल गुण होते हैं।खाद को अच्छे से प्रोसेस करने
मे मदद करता है
#गोबर की खाद:- इसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस काफी
अच्छी मात्रा में पाया जाता हैं जो गुलाब और मोगरे के लिए बेहतरीन
जैविक खाद हैं, यह मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाता हैं। इस
तरह पौधों को भरपूर पोषण मिलेगा और फूल आने लगेंगे
।फूलों का साइज भी बड़ा होगा
#किचेन वेस्ट कम्पोस्ट:- सब्जियों और फलों के छिलके या
कटे भागों से बना किचेन वेस्ट कम्पोस्ट पौधों को सभी
आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता हैं।रातभर पानी मे
भिगोकर अगले दिन उस पानी को पौधे मे डाले

इन सभी खादों का इस्तेमाल करके आप गुलाब और मोगरे के पौधे को जरूरी पोषक तत्व दे सकते हैं और उन्हें हरा-भरा और स्वस्थ बना सकते हैं।

#मोगरा

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