Bagiya Ki ABC

Bagiya Ki ABC Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Bagiya Ki ABC, Gardener, Indore.
(7)

​"बगिया की ABC में आपका स्वागत है! 🌱
यहाँ सीखें घर पर जैविक खाद (Organic Fertilizer) बनाना, पौधों की बीमारी (Pest Control) की पहचान और उनका सटीक इलाज। हर मौसम (Seasonal Tips) के अनुसार फल-फूलों की देखभाल की जानकारी। अपने गार्डन को एक्सपर्ट की तरह हरा-भरा

घर के बगीचे में उगाई गई सब्जियों का स्वाद ही कुछ अलग होता है, और जब बात टमाटर की हो, तो बात और भी खास हो जाती है। बाजार ...
30/05/2026

घर के बगीचे में उगाई गई सब्जियों का स्वाद ही कुछ अलग होता है, और जब बात टमाटर की हो, तो बात और भी खास हो जाती है। बाजार से महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने के बजाय, आप अपने घर पर ही बेहद आसानी से उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर के बीज तैयार कर सकते हैं।

​टमाटर के बीजों को सीधे सुखाकर रख देने से उनकी अंकुरण क्षमता कम हो जाती है, क्योंकि बीजों के चारों ओर एक प्राकृतिक जिलेटिनस (चिपचिपी) परत होती है, जो उन्हें उगने से रोकती है। इस परत को हटाने और बेहतरीन बीज तैयार करने के लिए फरमेंटेशन (खमीरीकरण) को सबसे वैज्ञानिक और बेस्ट तरीका माना जाता है। आइए इस पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं।

इस प्राकृतिक और वैज्ञानिक विधि से तैयार किए गए टमाटर के बीज अगले 2 से 3 वर्षों तक बुआई के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं और इनका अंकुरण प्रतिशत भी बाजार के बीजों से बेहतर होता है।

🔻 चरण 1: सही टमाटर का चयन

​बीज तैयार करने की शुरुआत हमेशा एक बेहतरीन फल के चुनाव से होती है।

🔹 ​वैरायटी: हमेशा देसी या ओपन-पॉलिनेटेड (OP) टमाटरों का ही चयन करें। हाइब्रिड (F1) टमाटर के बीजों से अगली पीढ़ी में वैसे ही फल नहीं मिलते।
🔹 ​फल की स्थिति: पौधा पूरी तरह स्वस्थ और रोगमुक्त होना चाहिए। उस पौधे से जो टमाटर आकार में सबसे अच्छा, पूरी तरह पका हुआ और चटख लाल हो, उसे ही बीज के लिए चुनें।

🔻 ​चरण 2: पल्प और बीजों को निकालना

🔹 ​टमाटर को बीच से आड़ा यानी हॉरिजॉन्टल काटें। ऐसा करने से उसके बीज वाले हिस्से आसानी से दिखने लगते हैं।
🔹 ​एक साफ चम्मच या उंगलियों की मदद से टमाटर के रस, गूदे और बीजों को एक कांच के जार या प्लास्टिक के साफ कप में निकाल लें। बचे हुए भाग को खाने में या कम्पोस्ट बिन में डाले।

🔻 चरण 3: फरमेंटेशन यानी खमीर उठाना

​यह इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बीजों के ऊपर लगी सुरक्षात्मक जेल की परत को नष्ट करता है और बीजों में छुपे फंगस को खत्म करता है।

🔹 ​जार में निकाले गए मिश्रण में केवल 1 से 2 चम्मच साफ पानी मिलाएं (ज्यादा पानी न डालें, नहीं तो बीज सड़ सकते हैं)।
🔹 ​जार के मुंह को एक सूती कपड़े या टिशू पेपर से ढककर रबर बैंड से सुरक्षित कर दें, ताकि हवा आती-जाती रहे लेकिन मक्खियां अंदर न जाएं।
🔹 ​इस जार को किसी गर्म और छायादार स्थान पर 2 से 3 दिनों के लिए रख दें। दिन में एक बार जार को हल्का सा हिला दें।

🔻 चरण 4: बीजों की सफाई और छंटाई

​3 दिन बाद आप देखेंगे कि जार के ऊपरी हिस्से पर एक सफेद या भूरे रंग की फंगस (परत) जम गई है। यह इस बात का संकेत है कि खमीर उठने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

🔹 ​अब जार का कपड़ा हटाकर उसमें साफ पानी भरें और उसे अच्छी तरह हिलाएं।
🔹 ​विज्ञान का नियम: जो बीज भारी और स्वस्थ होंगे, वे तुरंत जार की तली में बैठ जाएंगे। जो बीज खोखले, अधपके या खराब होंगे, वे पल्प और फंगस के साथ पानी के ऊपर तैरने लगेंगे।
🔹 ​ऊपर तैर रहे खराब बीजों और गूदे को धीरे से पानी के साथ बहा दें।
🔹 ​तली में बचे हुए अच्छे बीजों को एक बारीक छन्नी में निकालें और नल के साफ पानी के नीचे रखकर अच्छी तरह धो लें।

🔻 ​चरण 5: सुखाने की सही तकनीक

🔹 ​धुले हुए बीजों को एक बटर पेपर, प्लास्टिक की शीट या चीनी मिट्टी की प्लेट पर फैला दें।
🔹 ​विशेष ध्यान दें: बीजों को कभी भी अखबार या टिशू पेपर पर न सुखाएं, क्योंकि सूखने के बाद बीज कागज से चिपक जाते हैं और उन्हें निकालते समय वे टूट सकते हैं।
🔹 ​बीजों को किसी हवादार और छायादार जगह पर 5 से 7 दिनों तक पूरी तरह सूखने दें। इन्हें कभी भी सीधी तेज धूप में न रखें, अन्यथा बीजों के अंदर का भ्रूण (Embryo) मर सकता है।

🔻 ​भंडारण और सुरक्षा

​जब बीज पूरी तरह सूख जाएं और हाथ से छूने पर कड़क (क्रिस्पी) लगें, तब वे भंडारण के लिए तैयार हैं:

🔹 ​बीजों को किसी छोटी कांच की शीशी या जिपलॉक पाउच में रखें।
🔹 ​नमी से सुरक्षा के लिए पाउच के अंदर एक छोटा सिलिका जेल का पैकेट या कपड़े में बंधे हुए सूखे चावल के कुछ दाने डाल दें।
🔹 ​पैकेट के ऊपर टमाटर की वैरायटी और बीज तैयार करने का महीना व साल जरूर लिखें।

ये लेख आपको कैसा लगा हमें कमेंट में जरूर बताये। पसंद आया है तो शेयर करना न भूले।

#टमाटरकीखेती

29/05/2026

Change is good

कंटेनर गार्डनिंग (गमलों में बागवानी) हो या खेतों में बड़े पैमाने पर की जाने वाली पारंपरिक कृषि, गुड़ को एक अत्यंत प्रभाव...
28/05/2026

कंटेनर गार्डनिंग (गमलों में बागवानी) हो या खेतों में बड़े पैमाने पर की जाने वाली पारंपरिक कृषि, गुड़ को एक अत्यंत प्रभावी जैविक सुधारक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। प्राचीन काल से ही भारतीय कृषि परंपरा में गुड़ का उपयोग पौधों की स्वस्थ वृद्धि, मिट्टी के सुधार और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के लिए होता आया है। आधुनिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के दौर में गुड़ मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर हमारी प्रकृति और पौधों को पुनर्जीवित करने का एक बेहतरीन और सस्ता माध्यम है।

🔺 गुड़ के मुख्य लाभ

🔹 ​सूक्ष्म पोषक तत्वों का खजाना: गुड़ में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों के संपूर्ण विकास में सहायक हैं।
🔹 ​प्राकृतिक कीट व रोग नियंत्रण: यह एफ़िड्स (माहू), चींटियों, रूट नॉट नेमाटोड्स (जड़ के हानिकारक कीड़े) और मिट्टी जनित हानिकारक कवक को रोकने में मदद करता है।
🔹 ​माइक्रोबियल गतिविधि में वृद्धि: यह मिट्टी में पाए जाने वाले मित्र बैक्टीरिया और फंगस की संख्या और उनकी सक्रियता को तेजी से बढ़ाता है।
🔹 ​बेहतर पोषक तत्व अवशोषण: गुड़ के प्रयोग से मिट्टी की संरचना सुधरती है, जिससे पौधों की जड़ें पोषक तत्वों को अधिक बेहतर तरीके से सोख पाती हैं।
🔹 ​रोग प्रतिरोधक क्षमता: यह पौधों की आंतरिक इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मजबूत करता है, जिससे पौधे मौसम के उतार-चढ़ाव और बीमारियों को आसानी से सहन कर लेते हैं।

🔺 गुड़ एक जैविक खाद के रूप में क्यों काम करता है?

​गुड़ में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक शर्करा (ग्लूकोज और सुक्रोज) होती है। यह शर्करा मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों (जैसे राइजोबियम, एज़ोटोबैक्टर और ट्राइकोडेर्मा) के लिए एक तत्काल और शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत (भोजन) का काम करती है। जब इन सूक्ष्मजीवों को पर्याप्त भोजन मिलता है, तो वे करोड़ों की संख्या में विभाजित होते हैं। यही कारण है कि गुड़ जैविक खाद, कंपोस्ट, जीवामृत और 'वेस्ट डीकंपोजर' का मुख्य आधार माना जाता है, क्योंकि यह नाइट्रोजन फिक्सिंग बैक्टीरिया को सक्रिय कर मिट्टी की प्राकृतिक उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।

🔺 गुड़ के उपयोग के 6 प्रभावी तरीके

​1) समृद्ध जैविक खाद के रूप में

🔹 ​सामग्री: 200 ग्राम गुड़ + 10 लीटर पानी + 1 किलोग्राम गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट।
🔹 ​विधि: सर्वप्रथम गुड़ को पानी में अच्छी तरह घोल लें और इस घोल को 24 घंटे के लिए किसी छायादार स्थान पर ढककर रख दें। इसके बाद इसमें गोबर या वर्मी कंपोस्ट मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं और पौधों की जड़ों (मिट्टी) में डालें।
🔹 ​लाभ: मिट्टी में जैविक गतिविधियां तुरंत तेज होती हैं और पौधों की जड़ों को दीर्घकालिक पोषण मिलता है।

​2) गुड़ और छाछ का शक्तिशाली मिश्रण (फंगस नाशक)

🔹​सामग्री: 200 ग्राम गुड़ + 2 लीटर खट्टी छाछ + 10 लीटर पानी।
🔹 ​विधि: पानी में गुड़ और छाछ को आपस में अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण को 2 से 3 दिनों के लिए छोड़ दें ताकि लैक्टोबैसिलस और अन्य लाभकारी बैक्टीरिया सक्रिय हो सकें। इसके बाद इसे पौधों की जड़ों में डालें।
🔹 ​लाभ: यह पौधों को हानिकारक फफूंद और मिट्टी के कीटों से बचाता है तथा फसल की वृद्धि को गति देता है।

​3) कंपोस्ट संवर्धन मिश्रण

🔹 ​सामग्री: 200 ग्राम गुड़ + 500 मिलीलीटर पानी + 10 किलोग्राम गोबर खाद या वर्मी कंपोस्ट।
🔹 ​विधि: गुड़ और पानी का गाढ़ा घोल बना लें। इस घोल को 10 किलो खाद के ऊपर अच्छी तरह छिड़ककर मिला लें। इस खाद को मिट्टी तैयार करते समय या गमलों के ऊपरी हिस्से में डालें।
🔹 ​लाभ: यह खाद के भीतर मौजूद बैक्टीरिया को एक्टिव कर देता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन क्षमता तुरंत बढ़ जाती है।

​4) प्राकृतिक ग्रोथ प्रमोटर (सीमित उपयोग)

🔹 ​सामग्री: 5 से 10 ग्राम गुड़ + 1 लीटर पानी।
🔹 ​विधि: 1 लीटर पानी में मात्र 5-10 ग्राम गुड़ घोलें और इसे महीने में एक बार पौधों की जड़ों में दें।
🔹 ​लाभ: इससे सूक्ष्मजीवों को तुरंत ऊर्जा मिलती है और सुप्त पड़े पौधे भी तेजी से बढ़ने लगते हैं। (ध्यान रहे कि घोल को अधिक गाढ़ा न करें)।

​5) जैविक कीटनाशक स्प्रे

🔹 ​सामग्री: 1 लीटर पानी + 10 ग्राम गुड़ + 5 से 10 मिलीलीटर शुद्ध नीम का तेल।
🔹 ​विधि: पानी में पहले गुड़ को घोलें, फिर नीम का तेल मिलाएं (नीम तेल को पानी में आसानी से घोलने के लिए आप इसमें दो बूंद लिक्विड सोप भी मिला सकते हैं)। इसे अच्छी तरह हिलाकर पौधों की पत्तियों और तनों पर स्प्रे करें।
🔹 ​लाभ: गुड़ की चिपचिपाहट और नीम के औषधीय गुण मिलकर कीटों को दूर रखते हैं और पौधों को रोगों से बचाते हैं।

​6) फोलियर स्प्रे (पत्तियों के लिए सीधा पोषण)

🔹 ​सामग्री: 1 लीटर पानी + 5 ग्राम गुड़।
🔹 ​विधि: 1 लीटर पानी में सिर्फ 5 ग्राम गुड़ को रातभर के लिए घोलकर छोड़ दें। सुबह के समय इस हल्के घोल को पौधों की पत्तियों पर छिड़कें।
🔹 ​लाभ: पत्तियों के स्टोमेटा (रंध्रों) के माध्यम से पौधों को सीधा और तुरंत पोषण प्राप्त होता है।

🔺 अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानियां

🔹 ​सीमित मात्रा का ध्यान रखें: स्प्रे या ग्रोथ प्रमोटर के रूप में गुड़ का बहुत अधिक गाढ़ा घोल (जैसे 1 लीटर में 50-100 ग्राम) इस्तेमाल करने से बचें। अधिक गाढ़ा घोल पत्तियों या मिट्टी पर डालने से चींटियां, काली मक्खियां और हानिकारक फंगस आकर्षित हो सकते हैं।

🔹 ​केमिकल के साथ न मिलाएं: गुड़ के घोल को कभी भी रासायनिक खादों या केमिकल कीटनाशकों के साथ मिक्स न करें, क्योंकि केमिकल मिट्टी के उन मित्र बैक्टीरिया को मार देते हैं जिन्हें गुड़ जीवित करने की कोशिश करता है।

🍁 ​गुड़ पौधों की वृद्धि, मिट्टी की उर्वरता और कीट नियंत्रण का एक अत्यंत सरल, सस्ता और शत-प्रतिशत प्राकृतिक विकल्प है। इसके समझदारी भरे उपयोग से आप अपनी कंटेनर गार्डनिंग और खेती को पूरी तरह से जैविक, सुरक्षित और समृद्ध बना सकते हैं।

​क्या आपको यह जानकारी उपयोगी लगी? यदि हाँ, तो इसे अपने प्रकृति-प्रेमी मित्रों और परिवारजनों के साथ अवश्य साझा करें। अपने अनुभव, सुझाव या गार्डनिंग से जुड़े प्रश्न नीचे कमेंट में लिखना न भूलें। हम आपकी हर प्रतिक्रिया का स्वागत करते हैं!

:

28/05/2026

बारिश की तैयारी | Barish Me Kya Kare
#बारिश

आज के समय में कई बार पेड़ लगाना सिर्फ एक फोटो या सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह जाता है। इस मानसिकता को बदलना बहुत जरूरी ...
27/05/2026

आज के समय में कई बार पेड़ लगाना सिर्फ एक फोटो या सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह जाता है। इस मानसिकता को बदलना बहुत जरूरी है। लोग नर्सरी से महंगे पौधे लाकर लगा तो देते हैं, लेकिन पेड़ को सही तरीके से बढ़ने के लिए कुछ बुनियादी बातों को समझना आवश्यक है।

🔻सही स्थान का चयन: जहां पौधे को बढ़ने की पूरी जगह मिले।
🔻​नेटिव (देशी) प्रजातियां: जो स्थानीय मौसम के अनुकूल हों।
🔻​नियमित देखभाल: समय-समय पर पानी, खाद और सुरक्षा।
🔻​प्राकृतिक संतुलन: उसके आसपास की जैव विविधता (Biodiversity) को समझना।

🔹 ​प्रकृति का उपहार: मुफ्त और समृद्ध Biodiversity

​हमारे आसपास प्रकृति ने पहले से ही बहुत समृद्ध जैव विविधता दी है। कई देशी और नेटिव बीज हमारे आसपास आसानी से उपलब्ध होते हैं। इन्हें हम बिना किसी बड़े खर्च के खुद Collect कर सकते हैं और घर के एक छोटे से हिस्से में भी बेहतरीन पौधे तैयार कर सकते हैं।

🔹 ​घर पर पौधे तैयार करने के आसान तरीके

​बीज से पौधे तैयार करना बहुत आसान और आनंददायक काम है। इसके लिए महंगे गामलों की जरूरत नहीं है।

🔻​ सीड बॉल: जैसे हम सीड बॉल पर काम कर रहे हैं, यह बीजों को सुरक्षित रखने और उगाने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
🔻 ​वेस्ट मैनेजमेंट: किसी भी खाली प्लास्टिक पाउच या छोटे कंटेनर में मिट्टी और खाद भरकर बीज बोए जाएं, तो आसानी से नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं।

"पेड़ लगाना केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ एक लंबे रिश्ते की शुरुआत है।"

🔹​आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य 💚

​अगर हम सही समझ, सही प्रजातियों के चयन और उनकी जिम्मेदारी के साथ वृक्षारोपण करें, तो हम सिर्फ पौधे नहीं लगाएंगे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, हरा-भरा और संतुलित पर्यावरण तैयार करेंगे।

🔹 ​हमारा आज का संकल्प:

प्रकृति की सबसे अच्छी सेवा यही है कि हम ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं और जो हमारे पुराने, धरोहर रूपी पेड़ बचे हैं, उन्हें कटने से बचाएं। अभी के समय में शायद इससे जरूरी काम और कोई नहीं है।

#वृक्षारोपण #पेड़लगाओ #सीडबॉल #पर्यावरणसंरक्षण #देशीपौधे #दिखावा_नहीं_देखभाल #सस्टेनेबललाइफ #सच्ची_सेवा

मेरा पुराना अपराजिता का पौधा ❤️  ​ ​ ​ ​
26/05/2026

मेरा पुराना अपराजिता का पौधा ❤️






25/05/2026

अपराजिता का हैज कैसे तैयार करे | Aparajita Ka Hei Kese Teyar Kare

नौतपा क्या है?ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि आज जब सूर्य 25 मई 2026 को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा, तो नौतपा आरंभ हो...
25/05/2026

नौतपा क्या है?

ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि आज जब सूर्य 25 मई 2026 को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा, तो नौतपा आरंभ हो जाएगा। सरल शब्दों में समझें, तो ये ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले साल के 9 सबसे ज्यादा गर्म दिन होते हैं। वैसे, मान्यता यह भी है कि नौतपा जितना ज्यादा तपेगा, मानसून वाले बादल उतनी अच्छी बारिश करेंगे। इस दौरान सूरज की किरणें सीधी पड़ रही होती हैं।

देश में पड़ रही भीषण गर्मी को लेकर मौसम विभाग की ओर से जारी भारत का यह मैप देखिए. हीटवेव के बीच गर्मी का तेवर समझ में आ जाएगा। डार्क रेड वाले इलाके का मतलब वहां पारा 44 डिग्री के आसपास या उससे भी ऊपर पहुंच गया है।

डार्क रेड पर ब्लैक प्वाइंट्स बनें हैं, तो इसका मतलब 48 डिग्री के करीब तापमान पहुंच रहा है। यह बेहद खतरनाक स्थिति है। किअब नौतपा डराने लगा है। 25 मई से शुरू होकर नौतपा 2 जून तक रहेगा। इस दौरान देश में लू और गर्मी पीक पर रहने वाली है।

भीषण गर्मी के मामले में यूपी का बांदा अब पीछे हो गया है। महाराष्ट्र के विदर्भ रीजन में पारा 47 डिग्री के ऊपर पहुंच गया गया है। मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर-पश्चिमी भारत, मध्य भारत, उससे सटे उत्तर प्रदेश, पूर्वी और उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान 43-47°C के बीच रहा है। पूर्वोत्तर भारत, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और पश्चिमी-दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर तापमान 40-43°C के बीच दर्ज किया गया है। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस ब्रह्मपुरी (विदर्भ) में दर्ज किया गया।

मौसम विभाग ने देश के 29 शहरों का तापमान भी बताया है, जहां रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इसमें पूर्वी और पश्चिमी यूपी, पूर्वी एमपी, विदर्भ, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिमी राजस्थान के इलाके शामिल हैं।

कब तक चलेगी शरीर को सुखाने वाली लू ?

IMD के साइंटिस्ट डॉ. अखिल श्रीवास्तव ने बताया है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 7 दिनों तक और पूर्वी एवं उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में अगले 3-5 दिनों तक हीटवेव की स्थिति बनी रहने की संभावना है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि 29 मई से अधिकतम तापमान में गिरावट संभव है, जिससे हीटवेव भी कमजोर हो सकती है. 29 और 30 मई को तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट देखने को मिल सकती है।

#नौतपा #भीषण_गर्मी

घर पर NPK 10:10:10 के बराबर संतुलित ऑर्गेनिक खाद तैयार करना बहुत आसान है। रासायनिक खाद में NPK 10:10:10 में नाइट्रोजन (N...
24/05/2026

घर पर NPK 10:10:10 के बराबर संतुलित ऑर्गेनिक खाद तैयार करना बहुत आसान है। रासायनिक खाद में NPK 10:10:10 में नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), और पोटैशियम (K) बराबर मात्रा में होते हैं।

​ऑर्गेनिक तरीके से इस संतुलन को पाने के लिए हम तीन मुख्य चीजों को मिलाएंगे, जिनमें ये तीनों तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

​🛠️ आवश्यक सामग्री

NPK का संतुलन बराबर मात्रा में बनाने के लिए आपको इन तीनो को बराबर वजन में लेकर मिलाना होगा।

🔻 नाइट्रोजन (N) के लिए: सरसों की खली या नीम खली
🔻 ​फॉस्फोरस (P) के लिए: स्टीम्ड बोन मील अगर आप प्रयोग करते हैं तो। नही तो रॉक फॉस्फेट अगर आप शाकाहारी विकल्प चाहते हैं।
🔻 ​पोटैशियम (K) के लिए: केले के छिलकों का पाउडर या लकड़ी की राख।

​🥣 बनाने की विधि

​आप इसे दो तरीकों से बना सकते हैं। सूखा पाउडर या लिक्विड फर्टिलाइजर।

🔹 तरीका 1: सूखा मिक्स पाउडर

🔺 ​अनुपात: 1 भाग सरसों खली + 1 भाग बोन मील + 1 भाग केले के छिलके का पाउडर।
🔺 ​बनाने का तरीका: तीनों को अच्छी तरह आपस में मिला लें। आपकी होममेड संतुलित एनपीके खाद तैयार है।
🔺 ​इस्तेमाल कैसे करें: गमले के साइज के हिसाब से 1 से 2 चम्मच मिट्टी की गुड़ाई करके जड़ों से दूर डालें और फिर पानी दे दें। इसे महीने में एक बार इस्तेमाल करें।

🔹 तरीका 2: तुरंत असरदार लिक्विड खाद

​अगर आप पौधों को जल्दी न्यूट्रिशन देना चाहते हैं, तो यह तरीका सबसे बेस्ट है।

🔻 सामग्री:
• ​100 ग्राम सरसों की खली
• ​100 ग्राम रॉक फॉस्फेट या बोन मील
• ​3-4 सूखे केले के छिलके (या 100 ग्राम पाउडर)
• ​5 लीटर पानी

🔻 ​बनाने का तरीका:
∆ ​एक प्लास्टिक की बाल्टी में 5 लीटर पानी लें और उसमें ये तीनों चीजें डाल दें।
∆ ​इसे किसी कपड़े या ढक्कन से ढककर 3 से 4 दिनों के लिए छायादार जगह पर रख दें।
∆ ​रोज दिन में एक बार इसे किसी डंडे की मदद से हिलाएं।

🔹 इस्तेमाल कैसे करें:
4 दिन बाद इस मिक्चर को छान लें। इस्तेमाल करने से पहले इसमें बराबर मात्रा में साफ पानी (यानी 5 लीटर तैयार लिक्विड में 5 लीटर और पानी) मिलाएं। इसे आप अपने पौधों की जड़ों में सामान्य पानी की तरह दे सकते हैं।

अगर आप यह खाद मोगरा, गुड़हल या बेलपत्र जैसे हैवी फीडर पौधों में डाल रहे हैं, तो इसके साथ थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट या पुरानी गोबर की खाद भी मिला सकते हैं। इससे पौधों की ग्रोथ दोगुनी तेजी से होगी।

23/05/2026

अमृत खाद | Amrat Khad

नमस्ते दोस्तों! 🙏🌿​मैं हमेशा प्रयास करता हूँ कि आपको यहाँ कुछ नया, सटीक और उपयोगी सीखने को मिले।​अभी गर्मियों का मौसम आ ...
22/05/2026

नमस्ते दोस्तों! 🙏🌿

​मैं हमेशा प्रयास करता हूँ कि आपको यहाँ कुछ नया, सटीक और उपयोगी सीखने को मिले।

​अभी गर्मियों का मौसम आ चुका है, और हम सभी जानते हैं कि इस तेज धूप और झुलसाती गर्मी में गार्डनिंग करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। यह तपती धूप न सिर्फ हमारे पौधों को झुलसा देती है, बल्कि पेड़-पौधों की देखभाल करने में हमारी ऊर्जा भी सोख लेती है।

​इस चुनौतीपूर्ण मौसम में, मैं आपकी ज़रूरतों और समस्याओं के अनुसार ही कंटेंट तैयार करना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि आने वाले वीडियो और पोस्ट आपकी पसंद के हों और सीधे उन समस्याओं पर बात करें जो आप इस समय अपने गार्डन में फेस कर रहे हैं।

​📊 आप किस विषय पर जानकारी देखना चाहते हैं?

​☀️ समर प्लांट केयर: तेज धूप और लू से पौधों को कैसे बचाएं?

​💧 वॉटरिंग टिप्स: गर्मियों में पानी देने का सही समय और तरीका क्या हो?

​🍃 ऑर्गेनिक लिक्विड फर्टिलाइजर: इस मौसम के लिए सबसे ठंडी और बेस्ट जैविक खाद कौन सी है?

​🪴 कीट और बीमारियाँ: गर्मियों में लगने वाले कीड़ों से पौधों का बचाव कैसे करें?

​💭 अन्य विषय: या फिर कोई और खास पौधा/समस्या जिसके बारे में आप जानना चाहते हैं?

​अपनी पसंद और अपनी समस्या नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं! आपके सुझाव ही मेरी अगली वीडियो और पोस्ट की प्रेरणा बनेंगे। 👇✨

​ fans

Address

Indore

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Bagiya Ki ABC posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Bagiya Ki ABC:

Share

Category