Forest Environment Rural Development Society

Forest Environment Rural Development Society The Forest Envirment and Rural Development Committee is an organization created for forests in whic

इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गय...
15/01/2023

इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है।

माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।
स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥

सभी को अवगत किया जाता है रामनगर रानीखेत राजमार्ग पर बाग की गतिविधि देखी जा रही है इसलिए सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय के...
28/12/2022

सभी को अवगत किया जाता है रामनगर रानीखेत राजमार्ग पर बाग की गतिविधि देखी जा रही है इसलिए सूर्योदय से पूर्व या सूर्योदय के बाद दो गाड़ी या पैदल राहगीरों से नहीं जाने की अपील की जाती है।

विश्व वानिकी दिवस (International Day of Forests) प्रतिवर्ष 21 मार्च को विश्व भर में मनाया जाता है| इसकी स्थापना 28 नवंबर...
21/03/2022

विश्व वानिकी दिवस (International Day of Forests) प्रतिवर्ष 21 मार्च को विश्व भर में मनाया जाता है| इसकी स्थापना 28 नवंबर, 2012 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के संकल्प द्वारा की गई थी| असल में, नवंबर 1971 में, खाद्य और कृषि संगठन के सम्मेलन के 16 वें सत्र में सदस्य देशों ने प्रत्येक वर्ष 21 मार्च को "विश्व वानिकी दिवस" स्थापित करने का समर्थन किया था| बाद में 2007 से लेकर 2012 'अंतर्राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान केंद्र' (CIFOR) ने पार्टियों के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन पर 'संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन' की वार्षिक बैठकों के साथ संयोजन के रूप में छह वन दिवस (Forests Day) आयोजित किए| 2011 के वनों के अंतराष्ट्रीय वर्ष के बाद ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव द्वारा 'अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस' की स्थापना की गई, जिसके बाद 21 मार्च 2013 को पहला विश्व वानिकी दिवस (World Forestry Day) मनाया गया|

वन पंचायत के सॉथ संवाद
09/03/2022

वन पंचायत के सॉथ संवाद

।।सिताबनी की रानी की एक योद्धा बनने की कहानी।।अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर सभी प्रकृति प्रेमियों को समर्पित सिताबन...
29/07/2021

।।सिताबनी की रानी की एक योद्धा बनने की कहानी।।

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर सभी प्रकृति प्रेमियों को समर्पित

सिताबनी रिज़र्व फ़ॉरेस्ट अपनी बेजोड़ जेव विविधता के लिए जाना जाता है चाहे वनराज हो, नागराज हो या गजराज हो हर तरह के पशु- पक्षियों और जीवों का यहाँ बसेरा है. ये एलिफेंट कोरिडोर के लिए भी जाना जाता है और आसानी से उनके दर्शन हो भी जाते है परंतु यहाँके बाघों को देखना और उसे अपने कैमरे में उतरना हमेशा से ही टेढ़ी खीर रहा है.
यहाँ के बाघ बाहरी जगत के लिए हमेशा अनजान ही रहे पर इस मिथक को एक बाघिन ने तोड़ा जो आज सिताबनी का पर्याय बन चुकीहै..
सन २०१८ तक यहाँ के बाघों का तस्वीरों के रूप में कोई संकलन नहीं था तो इसे मैंने एक चुनोती के रूप में लिया और १५ महीने लगातारअथक प्रयास के बाद आख़िरकार एप्रिल २०१८ में, में यहाँ कि अपना पहला बाघ कैमरे में उतारने में कामयाब रहा और जिसे मैंने कैमरे मेंउतारा था वो यहीं बाघिन थी जहाँ दिखने में काफ़ी तगड़ी और तंदुरुस्त थी.
ये मेरी पहली मुलाक़ात थी इस बाघिन के साथ और जब मैंने इस बाघिन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाली तो इसने काफ़ी सुर्ख़ियाँबटोरी और लोगों का ध्यान सिताबनी की और खींचा..
मुझे नहीं पता था कि ये मुलाक़ात एक मुझे इसके इतने नज़दीक ले जाएगी जहाँ में इसके ऊपर पूरी एक कहानी लिखने कि मौक़ामिलेगा..
यहाँ से शुरू होती है इस बाघिन की एक योद्धा होने की कहानी..

उसी साल जून के आख़िरी महीने में मेरे दोस्त को एक बाघ घायल अवस्था में सड़क पार करता हुआ दिखा जिसकी कुछ तस्वीरें उसनेअपने मोबाइल फ़ोन में उतार ली और फ़ॉरेस्ट चौकी को भी इस बारे में अवगत करा दिया और ली हुई तस्वीरें अपने फ़ेसबुक पेज परसाझा कर दी जो एकदम से वाइरल हो गई जब मैंने इन तस्वीरों को देखा तो में हतप्रभ सा रह गया, क्यूँकि ये वही बाघिन थी जिसे मैंने दोमाह पहले ही देखा था दोनों की धारियाँ (हर बाघ कि अलग अलग धारियाँ होती है) समान थी.
ये एक परेशान करनी वाली ख़बर थी और ये बात मैंने तत्कालीन कैमरा ट्रेप प्रभारी के साथ साझा करी और उन्होंने ये बात उस समय कीरामनगर प्रभाग की डी एफ़ ओ से साझा करी..
इन तस्वीरों को नज़दीक से देखने पर पता चल रहा था कि ये बाघिन माँ बन चुकी थी और शावकों के साथ थी.. मुँह पर लगी चोटें काफ़ीगंभीर नज़र आ रही थी ऐसा लग रहा था कि दूसरे बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष या नर बाघ से अपने शावकों को बचाने में हुए संघर्ष मेंवो बुरी तरह घायल हो गई थी.
एक कान कटा हुआ साफ़ नज़र आ रहा था और पूरी नाक फटी हुई ख़ासकर नाक जो पूरे नोसल सिस्टम को बेकार कर सकती थी औरइस बाघिन की जान खतरे में पढ़ सकती थी..
मामले की गम्भीरता को देखते हुए आनन फ़ानन में एक गश्ती दल नियुक्त कर दिया गया और बिज़रानी जोन से दो हाथी मँगवा लिए गएताकि घायल बाघिन को रेस्क्यू कर उपचार दिया जा सके इसके लिए पशु चिकित्सक को भी बुलवा लिया गया और अगले ही दिन से हीघायल बाघिन की तलाश शुरू हो गई.जगह जगह कैमरा ट्रेप लगा दिए जगह ताकि उसकी गतिविधि का पता चल सके..
अगले ही दिन बाघिन कैमरा ट्रेप में नज़र आयी पर गश्ती दल को नहीं मिल पायी.उसके अगले दिन भी बाघिन कैमरा ट्रेप में नज़र आयीपर फिर भी वो गश्ती दल को नही मिल पायी..
उसके बाद बाघिन का कोई सुराग नहीं मिल सका और मानसून के चलते रेस्क्यू अभियान बंद कर दिया गया हालाँकि कैमरा ट्रेप सेनिगरानी जारी थी पर कोई संतोषजनक ख़बर नहीं मिल पायी..
कोई नहीं जानता था कि वो अब ज़िन्दा भी है या नहीं…
तक़रीबन एक माह बाद एक ख़ुशख़बरी आयी कि कोटा रेंज में लगाये गये कैमरा ट्रेप में ये बाघिन नज़र आयी है जो अपने आप में हैरानकरने वाली ख़बर थी क्यूँकि इतने गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद भी वो अपने आप को बचाने में कामयाब रही थी.
डारविन की कहावत सर्वाइवल ओफ़ द फ़िटिस्ट मतलब जंगल में जो योग्य है जो बलशाली है उसे ही जीने का अधिकार है इस बाघिनपर चरितार्थ हो रही थीं.
उसके बाद वो कई मौक़ों पर कैमरा ट्रेप व सड़क पार करते हुए राहगीरों को दिखायी दी पर हमेशा अकेले इसका मतलब दूसरे बाघ सेहुए संघर्ष में वो अपने शावकों को नहीं बचा पायी थी..
मेरे लिए वो एक तरह से ग़ायब ही रही क्यूँकि काफ़ी प्रयासों के बाद भी में उसे अपने कैमरे में नहीं उतार पाया..
समय बीतता गया और नवम्बर २०१९ में किसी पर्यटक को एक बाघिन ३ शावकों के साथ टेड़ा ग्रासलैंड नाले में दिखायी दी और उन्होंने नेउसे अपने कैमरे में उतार लिया.
जब मैंने वो फोटो देखी तो ख़ुशी का ठिकाना ना रहा क्यूँकि ये तो वही बाघिन थी जिसकी नाक फटी हुई थी जो वास्तव में इसकी पहचानबन चुकी थी. इसका मतलब ये पूरी तरह से ठीक हो गई थी और अब तीन शावकों की माँ थी जो अपने आप में काफ़ी सकूँ भरा अहसासथा और भावुक कर देने वाले लम्हे भी..
मेरे काफ़ी प्रयास करने के बाद भी में इसको शावकों समेत नहीं खींच पाया हालाँकि इस बीच मुझे इसका एक शावक दो मौक़ों परदिखायी दिया पर इसे में अपने कैमरे में नहीं उतार पाया..
समय बीतता गया और एप्रिल २० में मुझे ये सड़क किनारे झाड़ियों के बीच आराम करती हुई दिखी पर अकेली जहाँ इसका एक कानसाफ़ कटा हुआ नज़र आ रहा था और फटी हुई नाक भी,मानो कभी ना भरने वाले घाव…

इसी साल जून के महीने में इसने कोसी नदी के किनारे दो मवेशियों का शिकार कर दिया ख़ुशक़िस्मती से में वह समय पर पहुँच गयाऔर जब ये उनमें से एक मवेशी को एक सीधी ढलान से खींचकर ऊपर जंगल को के जा रही थी तब मुझे इसको अपने कैमरे में उतारनेका मौक़ा मिल गया जिस तरह से सीधी चढ़ाई में ये मवेशी को खींचकर ले जा रही थी वो देखने लायक़ लम्हा था उस दिन मुझे इसकीताक़त का आभास हुआ..
मुझे पता था कि इसके साथ शावक भी हैं और ये पानी पीने के लिये उन्हें बाहर ज़रूर ले के लाएगी पर इतना तो तय था उनकी सुरक्षाहेतु वो इतने खुले में ले के नहीं आएगी और एक ऐसा पानी का स्रोत मुझे पता था जो जंगल से सटा हुआ था और वहाँ ये अपने शावकोंके साथ आसानी से पानी पीने आ सकती है..
मेरा सोचना सही साबित हुआ और अगले दिन घंटों इंतज़ार के बाद आँखिरकार मेरे अनुमान के मुताबिक़ वो बाहर निकली और उस पानीके स्रोत के पास आयी और पानी में बैठ गई फिर उसने एक आवाज़ निकाली जो एक संकेत था कि आ जाओ कोई ख़तरा नहीं है..
फिर धीरे धीरे तीनों शावकों ने एक एक करके आना शुरू किया और माँ के साथ पानी में बैठ गये..
ख़ुशकिस्मती से में पूरे परिवार को एक साथ अपने कैमरे में उतारने में कामयाब रहा ..
ये देखना काफ़ी सुखद था की इतने घायल होने की बाद भी उसने अपना परिवार बनाया और अब सही ढंग से उन सभी शावकों की अच्छेढंग से परवरिश कर रही थी..
पूरे परिवार की तस्वीरें सोशल मीडिया में साझा करने के बाद तो मानो भूचाल ही आ गया, लॉकडाउन के दौरान ली गई शावकों के साथइसकी ये तस्वीर रातों रात हर सोशल मीडिया पर वाइरल हो गई और हर कोई इसे देखने के लिए प्रयास करने लगा सुबह हो या शामरामनगर- सीताबनी मार्ग पर गाड़ियों का ताँता लगने लगा.

उसके बाद इससे मेरी मुलाक़ात टेड़ा गाँव के नज़दीक ही मुख्य मार्ग पर हुई जहाँ ये अपने शावकों को सड़क पार करके कोसी नदी को लेजा रही थी.

इसी साल अगस्त माह में इसने रामनगर - सिताबनी मार्ग के किनारे नाले में दिन दहाड़े एक मवेशी को मार दिया जिसकी पूरी शृंखला कोमें खिचने में कामयाब रहा जो अगले दिन सभी प्रमुख समाचारपत्रों की हेडलाइन थी और सोशल मीडिया में भी काफ़ी वाइरल हो रही थी.
इसी शृंखला की तस्वीरें देखते वक्त एक तस्वीर ने मेरे होश उड़ा दिए ज़ूम करके देखने पर पता चला की ये बाघिन अपनी एक आँख भीखो चुकी थी शायद किसी हिरन का शिकार करते हुए उसके सींग से इसकी आँख निकल गई थी..
जो भी हुआ था पर ये एक बुरी ख़बर थी क्यूँकि शावक अभी छोटे थे और स्वयं शिकार करने लायक नहीं थे और भोजन के लिए पूरी तरहसे माँ पर निर्भर थे..
और एक आँख के चले जाने पर किसी भी शिकारी जानवर के लिए शिकार कर पाना मुश्किल होता है ऐसे में इन शावकों के भविष्य केऊपर एक सवालिया निशान पैदा हो गया था कि माँ द्वारा शिकार ना कर पाने की स्थिति में वो ज़िंदा बच भी पाएँगे या नहीं..

लेकिन कहते हैं ना जो असली योद्धा होते है वो किसी भी विषम परिस्थितियों से निकल कर आ जाते है और उन का डट कर सामना करतेहैं और ये सारी बातें इस बाघिन पर चरितार्थ होती है

इसने भी एक योद्धा की तरह हर परिस्थिति का डट कर सामना किया और शिकार करने की अपनी असाधारण क्षमता के बदौलत अपनेशावकों को पाल पोष कर बड़ा कर दिया और मुझे बार बार ग़लत साबित किया..

अभी हाल में ही ये मुझे अपने नर शावक के साथ सड़क पार करती हुई दिखायी दी जिसे देखना काफ़ी सकूँ भरा अहसास था क्यूँकिइसे में २०१८ से देख रहा हूँ. इसने शावकों की परवरिश में कोई लापरवाही नहीं बरती इतने घायल होने के बाद भी ये लगातार शिकारकरती रही और उनका पेट भरती रही.
आज शावक लगभग पूरे ढाई साल के हो चुके हैं और अपना नया इलाक़ा बनाने की और अग्रसर है और आज भी ये अपने शावकों के साथ दिखायी दे जाती है.

आज ये सिताबनी की पहचान बन चुकी है और लाखों लोगों की चहेती भी.
इसकी एक झलक पाने के लिए रामनगर- सिताबनी भीमार्ग पर सैलानियों का ताँता लगा रहता है और जो ख़ुशक़िस्मत होते हैं वो इसकी एक झलक पाकर ही अपने को ख़ुशक़िस्मत समझते हैं..
भारी भरकम गठीला डील डोल जगह जगह चोटों के निशान इसे एक योद्धा का रूप देते हैं और ये सच में एक योद्धा ही है और इसेसिताबनी की शान..

आमतौर पर बाघ शर्मीले स्वभाव के होते हैं और कम ही दिखायी देते हैं पार इस बाघिन ने इन मान्यताओं को दरकिनार कर अपने निडर व्यवहार के चलते अपनी
इन्हीं असाधारण क्षमताओं के बदौलत सिताबनी को आज विश्व पटल पर लाकर खड़ा कर दिया है.

सतावर का वानस्पतिक नाम Asparagus racemosus एक औषधीय गुणों वाला पादप है। इसे सतमुल, सतमुली के नाम से भी जानते है। ये मुख्...
29/05/2021

सतावर का वानस्पतिक नाम Asparagus racemosus एक औषधीय गुणों वाला पादप है। इसे सतमुल, सतमुली के नाम से भी जानते है। ये मुख्यत: जंगलों और मैदानी क्षेत्रों में पाई जाती है, ये स्वत: ही उगने वाली जड़ी बूटी है। आयुर्वेद में इसे ओषधियो की रानी माना जाता है।
सतावर की जड़ का उपयोग मुख्य रूप से ग्लैक्टागोज के लिए किया जाता है जो स्तन दुग्ध के स्राव को उत्तेजित करता है। इसका उपयोग शरीर से कम होते वजन में सुधार के लिए किया जाता है तथा इसे कामोत्तेजक के रूप में भी जाना जाता है। इसकी जड़ का उपयोग दस्त, क्षय रोग (ट्यूबरक्लोसिस) तथा मधुमेह के उपचार में भी किया जाता है। सामान्य तौर पर इसे स्वस्थ रहने तथा रोगों के प्रतिरक्षण के लिए उपयोग में लाया जाता है।

हिमालय की पहाडीयों और उत्तराखंड के जंगलों में पाया जाने वाला एक पहाड़ी फल जिसके नाम में ही इसके गुण छिपे हुए है यानी कफ ...
10/05/2021

हिमालय की पहाडीयों और उत्तराखंड के जंगलों में पाया जाने वाला एक पहाड़ी फल जिसके नाम में ही इसके गुण छिपे हुए है यानी कफ और वात को हरने वाला फल काफल। इसका वैज्ञानिक नाम मिरिका एस्कुलेंटा है। यह फल अपने आप में जड़ी बूटी है काफल के छाल, फल, बीज,फूल सभी का उपयोग आयुर्विज्ञान में किया जाता है। काफल के फायदे __
काफल सास संबधी समस्याओं, डायबिटीज, पाइल्स,मोटापा, सूजन, जलन, मुंह में छाले, मुत्रदोष, बुखार, अपच, सुक्राणु के लिए फायदेमंद व दर्द निवारण में उत्तम है।
काफल का उपयोग सिरदर्द में , आंखों के इलाज में, नाक की समस्याओं में ,दात दर्द में ,कान के दर्द में , सास संबधी समस्याओं में ,खासी में फायदेमंद, दस्त में राहत मिलती है, नपुस्कंता दूर होती है, पेट दर्द में लाभ, लकवा, बुखार में लाभ, सूजन दूर करे, अत्यधिक पसीने को दूर करे।

17/04/2021
14/04/2021

पहाड़ी क्षेत्रों में कटेली झाड़ियों में उगने वाला यह फल का उपयोग विदेशो में एंटी ऑक्सीडेंट यानी कैंसर जैसी बीमारियों के उपयोग में किया जाता है। इस पौधे में एंटी डायबिटीज, एंटी इनफ्लेमेंटरी , एंटी ट्यूमर, एंटी वायरल और एंटी बैकट्रियल तत्व पाए जाते है। डायबिटीज के इलाज में इसका सबसे ज्यादा उपयोग होता है ।
किल्मोडा के फल में पाए जाने वाले एंटी बैकट्रियल तत्व शरीर को कई बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। दाद, खाज, फोड़े, फुंसिया का इलाज तो इसकी पत्तियों से हो जाता है, अगर आप दिन भर में करीब 5 से 10 किल्मोडे के खाते है तो यह आपके शुगर लेवल को कंट्रोल कर देता है। डायबिटीज के इलाज में इसका सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है। किल्मोडे के फलों के रस , पत्तियों के रस का उपयोग कैंसर की दवा तैयार करने में किया जाता है। किल्मोडे के तेल से जो दवा तैयार होती है उसका उपयोग शुगर, बीपी, वजन कम करने में, अवसाद, दिल की बीमारियों के रोक थाम में किया जाता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में शुगर से ग्रशित लोग किल्मोडे की जड़ का उपयोग दवा के रूप में करते है।

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